राजनीति

‘कलेक्टर्स कान खोलकर सुन लें, पुंगी बजा देंगे’: राजस्थान में वोटर लिस्ट पर ‘महायुद्ध’, डोटासरा-जूली ने खोला मोर्चा

जयपुर | राजस्थान की शांत दिखने वाली सर्दियों में सियासी पारा अचानक सातवें आसमान पर पहुंच गया है। वजह कोई चुनाव प्रचार नहीं, बल्कि लोकतंत्र की सबसे बुनियादी प्रक्रिया— ‘मतदाता सूची’ (Voter List) है। राज्य में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR – Special Intensive Revision) को लेकर कांग्रेस ने भजनलाल सरकार और प्रशासनिक मशीनरी के खिलाफ ‘आर-पार’ की जंग का ऐलान कर दिया है।

मामला तब गरमा गया जब पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने अपने ठेठ अंदाज में जिला कलेक्टर्स को खुली चेतावनी दे दी— “कलेक्टर्स कान खोलकर सुन लें, पुंगी बजा देंगे।”    

‘पुंगी’ वाला अल्टीमेटम और ‘टारगेट 50’ का सच

गोविंद सिंह डोटासरा, जो अपनी आक्रामक शैली के लिए जाने जाते हैं, ने इस बार सीधे नौकरशाही (Bureaucracy) की “दुखती रग” पर हाथ रखा है। उनका आरोप है कि राज्य में प्रशासनिक अधिकारी भाजपा के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं। डोटासरा ने एक सनसनीखेज दावा किया है कि हर बूथ पर 50 नाम जोड़ने या हटाने का एक ‘अघोषित टारगेट’ सेट किया गया है ।   

कांग्रेस का आरोप है कि “कुछ बड़े अधिकारी” बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) से उनका ओटीपी (OTP) मांग रहे हैं ताकि सिस्टम में लॉग-इन करके थोक में (in bulk) फर्जी नाम जोड़े जा सकें या कांग्रेस समर्थकों के नाम काटे जा सकें । डोटासरा का “पुंगी बजा देंगे” वाला बयान इसी संदर्भ में अधिकारियों को भविष्य की चेतावनी है कि सरकार बदलते ही उनका हिसाब किया जाएगा।   

जूली का गंभीर आरोप: ‘दबाव में सुसाइड कर रहे बीएलओ’

इस विवाद को और गंभीर बनाते हुए नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इसे मानवाधिकार के मुद्दे से जोड़ दिया है। जूली ने दावा किया कि एसआईआर (SIR) के नाम पर बीएलओ (BLO) पर इतना अनैतिक दबाव डाला जा रहा है कि वे मानसिक रूप से टूट रहे हैं।

जूली ने एक चौंकाने वाला बयान देते हुए कहा, “एसआईआर के नाम पर वोटर लिस्ट में बड़ी गड़बड़ी की जा रही है… खुद बीएलओ परेशान होकर आत्महत्या कर रहे हैं।”    

जूली ने पड़ोसी राज्य बिहार का उदाहरण देते हुए सरकार को घेरा। उन्होंने पूछा कि जब बिहार में एसआईआर के दौरान 75 लाख नाम काटे गए, तो राजस्थान सरकार यह क्यों नहीं बता रही कि यहाँ अब तक कितने लाख नाम हटाए गए हैं? विपक्ष इसे “डेटा की गोपनीयता” नहीं बल्कि “लोकतंत्र की चोरी” बता रहा है ।   

‘SIR.apk’: वोटर लिस्ट में साइबर ठगों की एंट्री

इस सियासी ड्रामे में एक नया और खतरनाक मोड़ साइबर अपराध का भी आ गया है। जहाँ एक तरफ नेता आरोप लगा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ‘SIR.apk’ नाम से एक फर्जी ऐप और ओटीपी स्कैम (OTP Scam) चल रहा है।

साइबर अपराधी चुनाव आयोग के अधिकारी बनकर लोगों और बीएलओ को कॉल कर रहे हैं और वेरिफिकेशन के नाम पर ओटीपी मांग रहे हैं। भोपाल साइबर सेल और अन्य एजेंसियों ने चेतावनी जारी की है कि जालसाज ‘SIR.apk’ फाइल भेजकर मोबाइल हैक कर रहे हैं । यह स्थिति भ्रम पैदा कर रही है—क्या ओटीपी वास्तव में अधिकारी मांग रहे हैं या कोई साइबर ठग? राजनीतिक दल इस भ्रम का इस्तेमाल अपने-अपने दावों को मजबूत करने के लिए कर रहे हैं।

बीजेपी का पलटवार: ‘बरसाती मेंढक हैं कांग्रेसी’

कांग्रेस के इस चौतरफा हमले पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी करारा जवाब दिया है। बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए डोटासरा और उनके साथियों की तुलना “बरसाती मेंढकों” से की है ।   

राठौड़ का कहना है कि कांग्रेस अपनी संभावित हार और अंदरूनी गुटबाजी से ध्यान हटाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर हमला कर रही है। बीजेपी का तर्क है कि डोटासरा पहले “अपना घर संभालें” और अधिकारियों को धमकाना बंद करें। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण एक पारदर्शी प्रक्रिया है और इसमें किसी भी तरह की हेराफेरी संभव नहीं है ।   

50,000 ‘जासूसों’ की फौज तैयार

इस बार कांग्रेस केवल बयानों तक सीमित नहीं है। पार्टी ने डोटासरा के नेतृत्व में 50,000 बूथ लेवल एजेंट (BLA) की एक फौज तैयार की है । इन एजेंट्स को विशेष ट्रेनिंग दी गई है कि वे वोटर लिस्ट में होने वाले हर एक बदलाव, विशेषकर ‘शिफ्टेड’ (Shifted) और ‘मृत’ (Dead) श्रेणी में हटाए जाने वाले नामों का भौतिक सत्यापन करें।   

7 फरवरी पर टिकी निगाहें

चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, अंतिम मतदाता सूची 7 फरवरी, 2026 को प्रकाशित होनी है । जैसे-जैसे यह तारीख नजदीक आ रही है, राजस्थान की राजनीति में जुबानी जंग और तेज होने के आसार हैं। डोटासरा की ‘पुंगी’ और जूली के ‘आत्महत्या’ वाले बयानों ने यह साफ कर दिया है कि विपक्ष इस मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक ले जाने के मूड में है।   

अब देखना यह है कि 7 फरवरी को जब लिस्ट बाहर आएगी, तो उसमें ‘वोट की चोट’ किसे लगती है— सत्ता पक्ष को या विपक्ष को।

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