अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसे द्विपक्षीय संबंधों में नई शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। बैठक के बाद रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच कोई औपचारिक शिखर वार्ता (Summit) नहीं हुई थी, और संबंध शीत युद्ध के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुँच गए थे। लेकिन अब वक़्त है कि टकराव की जगह संवाद और सहयोग की ओर कदम बढ़ाए जाएं।
‘पड़ोसी भी, भले समुद्रों से अलग हों’
पुतिन ने कहा कि हालांकि अमेरिका और रूस भौगोलिक रूप से बड़े महासागरों से अलग हैं, लेकिन असल में वे एक-दूसरे के बेहद क़रीबी पड़ोसी हैं, क्योंकि दोनों देशों के बीच की वास्तविक दूरी महज 4 किलोमीटर है। इस बात को उन्होंने ट्रंप से मुलाक़ात के दौरान भी बड़े दिलचस्प अंदाज़ में बताया। हवाई अड्डे पर पुतिन ने ट्रंप को देखकर कहा— “नमस्ते पड़ोसी!”
उन्होंने उस ऐतिहासिक तथ्य का भी ज़िक्र किया कि करीब 158 साल पहले अलास्का रूस का हिस्सा हुआ करता था। पुतिन ने कहा कि आज भी अलास्का में रूसी ऑर्थोडॉक्स चर्चों की मौजूदगी यह याद दिलाती है कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव रहा है, जिसे आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
मॉस्को में अगली मीटिंग का प्रस्ताव
बैठक में पुतिन ने अगली वार्ता के लिए ट्रंप को मॉस्को आने का निमंत्रण भी दिया। इस पर ट्रंप ने कहा कि यह निर्णय शायद कई लोगों को पसंद नहीं आएगा और इसकी आलोचना भी हो सकती है, लेकिन उन्होंने इस संभावना को पूरी तरह नकारा नहीं। ट्रंप का कहना था— “यह संभव है।”
इस मुलाक़ात से संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच लंबे समय बाद फिर से बातचीत और विश्वास बहाली की कोशिश शुरू हो सकती है, जो आने वाले समय में वैश्विक राजनीति के लिए बहुत अहम साबित हो सकती है।
