बीकानेर : केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने #SaveAravali अभियान के बीच साफ किया कि अरावली रेंज का 98 प्रतिशत हिस्सा पहले से ही संरक्षित है। सोशल मीडिया पर वायरल तबाही की तस्वीरें 8-10 साल पुरानी हैं, जो कांग्रेस शासनकाल के अवैध खनन की हैं। नई खनन पट्टों पर पूर्ण प्रतिबंध बरकरार रहेगा।
पहाड़ नापने का सरल फॉर्मूला
मंत्री ने स्पष्ट किया कि आसपास की जमीन से 100 मीटर या अधिक ऊंची चोटियां ही अरावली मानी जाएंगी। यदि 500 मीटर दायरे में दो या अधिक ऐसी चोटियां हों, तो बीच की घाटियां व ढलानें भी संरक्षित श्रेणी में आएंगी। सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में इस परिभाषा को मंजूरी दी है। कुल 1.44 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में मात्र 0.19 प्रतिशत में ही खनन की संभावना है।
पूर्व राजस्थान सरकार पर गंभीर आरोप
यादव ने अशोक गहलोत सरकार पर अवैध खनन को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद से लेकर टाइगर रिजर्व और इको-सेंसिटिव जोन तक सभी क्षेत्र सुरक्षित हैं। ग्रीन अरावली प्रोजेक्ट को न्यायालय समर्थन मिला है, जबकि भारतीय वन अनुसंधान परिषद (ICFRE) विस्तृत नक्शा और प्रबंधन योजना तैयार करेगी। रिपोर्ट आने तक स्थिति स्थिर रहेगी।
