क्राइम

अलवर में हैवानियत की हद: विवाहिता के साथ 11 दिन तक गैंगरेप, पुलिस की निष्क्रियता पर उठे सवाल

अलवर | राजस्थान के अलवर जिले में एक दिल दहलाने वाली घटना ने मानवता को शर्मसार कर दिया है। एक विवाहिता को सात लोगों ने 11 दिनों तक बंधक बनाकर बारी-बारी से सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) का शिकार बनाया। पीड़िता के विरोध करने पर उसके मुंह में कपड़ा ठूंसकर उसे बेहोशी की हालत में सड़क किनारे फेंक दिया गया। इस जघन्य अपराध के बाद भी पुलिस की कथित निष्क्रियता ने पीड़ित परिवार को कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर कर दिया। कोर्ट के आदेश पर 2 जून 2025 को बगड़ तिराया थाने में मामला दर्ज हुआ, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से परिवार ने डीएसपी कार्यालय में पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है।

घटना का खौफनाक विवरण

यह दिल दहलाने वाली घटना 25 अप्रैल 2025 की रात करीब 9 बजे की है। पीड़िता, जो अपने घर के बाहर शौच के लिए गई थी, को सात लोगों ने जबरन एक बोलेरो गाड़ी में खींच लिया। उसे पनियाला रोड के पास एक सुनसान जगह पर ले जाया गया, जहां गाड़ी में ही सभी आरोपियों ने बारी-बारी से उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता ने बचने के लिए चिल्लाने की कोशिश की, लेकिन आरोपियों ने उसके मुंह में कपड़ा ठूंसकर उसकी आवाज दबा दी। इसके बाद, उसे 11 दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया, जहां लगातार उसका यौन शोषण किया गया।

वीडियो बनाकर दी धमकी

आरोपियों ने पीड़िता की पीड़ा को और बढ़ाते हुए उसके साथ दुष्कर्म के दौरान वीडियो बनाया और इसे सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी। इस डर और शर्मिंदगी के कारण पीड़िता और उसका परिवार शुरुआत में चुप रहा। 11 दिन की अमानवीय यातना के बाद, जब पीड़िता की हालत गंभीर हो गई, तो आरोपियों ने उसे बेहोशी की हालत में सड़क किनारे फेंक दिया और फरार हो गए। पीड़िता को बाद में राहगीरों ने देखा और उसके परिवार को सूचित किया।

पुलिस की निष्क्रियता और कोर्ट का हस्तक्षेप

घटना के बाद पीड़िता ने अपने परिवार को आपबीती बताई, लेकिन आरोपियों के प्रभाव और दबाव के कारण परिवार डर के मारे तुरंत पुलिस के पास नहीं गया। जब परिवार ने हिम्मत जुटाकर बगड़ तिराया थाने में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, तो पुलिस ने कथित तौर पर मामला दर्ज करने से इनकार कर दिया। इस निष्क्रियता से निराश होकर परिवार ने कोर्ट का रुख किया। कोर्ट के आदेश पर 2 जून 2025 को बगड़ तिराया थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई। हालांकि, तीन महीने बीत जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई न होने से परिवार ने अब डीएसपी कार्यालय में पहुंचकर न्याय की मांग की है।

सामाजिक और प्रशासनिक सवाल

यह घटना न केवल अपराधियों की हैवानियत को उजागर करती है, बल्कि पुलिस की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठाती है। सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर लोगों में गुस्सा और आक्रोश देखा जा रहा है। कई यूजर्स ने पुलिस की निष्क्रियता की आलोचना करते हुए इसे महिलाओं की सुरक्षा के प्रति लापरवाही का प्रतीक बताया है। एक यूजर ने लिखा, “जब एक महिला के साथ इतना जघन्य अपराध हो और पुलिस शिकायत तक दर्ज न करे, तो आम जनता का भरोसा कैसे बनेगा?”

इसके अलावा, यह मामला अलवर में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों की गंभीर स्थिति को भी दर्शाता है। 2021 के राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान में बलात्कार के मामलों में सबसे अधिक मामले दर्ज किए गए थे, और अलवर जैसे जिले इस समस्या का केंद्र रहे हैं। इस तरह की घटनाएं समाज में महिलाओं की सुरक्षा और प्रशासन की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।

परिवार की गुहार और जांच की स्थिति

पीड़िता के पति ने बताया कि उनकी शिकायत के बावजूद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। परिवार अब डीएसपी कार्यालय पहुंचा है, जहां उन्होंने अपनी शिकायत को फिर से उठाया और त्वरित कार्रवाई की मांग की। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस मामले में जांच शुरू हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई आरोपी गिरफ्तार नहीं हुआ है। डीएसपी कार्यालय ने परिवार को भरोसा दिलाया है कि मामले की गहन जांच की जाएगी और दोषियों को सजा दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।

समाज में आक्रोश और मांग

इस घटना ने न केवल अलवर, बल्कि पूरे राजस्थान में लोगों के बीच आक्रोश पैदा किया है। सोशल मीडिया पर लोग इस मामले को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस घटना की निंदा की है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। स्थानीय लोग और महिला संगठन इस मामले में त्वरित न्याय की मांग कर रहे हैं, साथ ही पुलिस सुधारों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की अपील कर रहे हैं।

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