देशभर में आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का नया फैसला सामने आया है, जो राजस्थान समेत पूरे भारत में लागू होगा। पिछले दिनों इस मुद्दे पर डॉग लवर्स के विरोध और सड़कों पर प्रदर्शनों के बाद कोर्ट ने मामले की दोबारा सुनवाई की। आज तीन न्यायाधीशों की बेंच ने एक अहम interim आदेश जारी किया, जिसमें कुत्तों की नसबंदी, टीकाकरण और सार्वजनिक स्थानों पर खाना खिलाने पर पाबंदी जैसे कदम शामिल हैं। यह फैसला न केवल दिल्ली-एनसीआर, बल्कि पूरे देश के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि दिल्ली-एनसीआर से पकड़े गए आवारा कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद उसी क्षेत्र में वापस छोड़ा जाए, जहां से उन्हें लिया गया था। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने यह भी निर्देश दिया कि आक्रामक व्यवहार या रेबीज से पीड़ित कुत्तों का विशेष ध्यान रखा जाए और उनका इलाज सुनिश्चित किया जाए। यह नीति देश के हर राज्य पर लागू होगी, जिससे कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने का एक समान मॉडल सामने आएगा।
कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सार्वजनिक स्थानों जैसे सड़कों, पार्कों और चौराहों पर आवारा कुत्तों को खाना खिलाने पर रोक लगा दी है। इस नियम का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। कोर्ट का मानना है कि यह कदम कुत्तों के अनियंत्रित जमावड़े और इसके कारण होने वाले हादसों को रोकने में मददगार होगा।
समस्या के व्यावहारिक समाधान के तौर पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम (MCD) को हर वार्ड में ‘फीडिंग जोन’ स्थापित करने का आदेश दिया है। इन खास क्षेत्रों में ही पशु प्रेमी कुत्तों को भोजन दे सकेंगे। साथ ही, MCD को एक हेल्पलाइन नंबर शुरू करने का निर्देश दिया गया है, जहां लोग आदेश के उल्लंघन की शिकायत दर्ज करा सकेंगे। यह कदम कुत्तों की देखभाल और जनता की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है।
कोर्ट ने NGO और पशु प्रेमियों के लिए भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अगर कोई इस मामले में अपनी बात कोर्ट में रखना चाहता है, तो उसे 25,000 से 2 लाख रुपये की राशि जमा करानी होगी। हालांकि, इस राशि के उपयोग का स्पष्ट कारण अभी सामने नहीं आया है। इसके अलावा, पशु प्रेमी MCD से संपर्क कर कुत्तों को गोद ले सकते हैं, जिससे उनकी देखभाल सुनिश्चित हो सके।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर कोई व्यक्ति कुत्तों से संबंधित सरकारी कार्यों, जैसे पकड़ना या टीकाकरण, में बाधा डालता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। यह निर्देश सरकारी कर्मचारियों को बिना रुकावट काम करने में मदद करेगा और प्रक्रिया को सुचारू बनाएगा।
तीन सदस्यीय बेंच ने सभी राज्यों से इस फैसले पर 8 हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई होगी। कोर्ट का यह कदम देशभर में कुत्तों की बढ़ती आबादी और इससे जुड़ी समस्याओं से निपटने की दिशा में एक ठोस पहल है।
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