सुप्रीम कोर्ट ने अरावली संरक्षण पर सख्त रुख अपनाया: अवैध खनन पर ‘पूर्ण अपराध’ की चेतावनी, एक्सपर्ट कमेटी गठन का फैसला

जयपुर/नई दिल्ली, 21 जनवरी 2026: अरावली पर्वतमाला के संरक्षण और अवैध खनन के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने आज बड़ा फैसला सुनाया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ (जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली के साथ) ने स्पष्ट कहा कि अवैध खनन “पूर्ण अपराध” है और इससे पर्यावरण को अपूरणीय (irreversible) क्षति पहुंच सकती है। कोर्ट ने राजस्थान सरकार को कड़ा निर्देश दिया कि अरावली क्षेत्र में किसी भी गैरकानूनी खनन गतिविधि को बिल्कुल नहीं होने दिया जाए।

पीठ ने राजस्थान सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के. एम. नटराज के आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया कि कोई भी अनधिकृत खनन नहीं होगा। साथ ही, कोर्ट ने अपने 29 दिसंबर 2025 के अंतरिम आदेश को अगले आदेश तक जारी रखा, जिसमें 20 नवंबर 2025 के फैसले में स्वीकृत 100 मीटर ऊंचाई आधारित अरावली की नई परिभाषा पर रोक बनी रहेगी।

हाई-पावर्ड एक्सपर्ट कमेटी बनेगी

सुप्रीम कोर्ट ने अरावली की परिभाषा, विस्तार, खनन गतिविधियां और संरक्षण से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच के लिए एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित करने का प्रस्ताव रखा। यह कमेटी पर्यावरणविदों, वैज्ञानिकों, खनन विशेषज्ञों और अन्य डोमेन एक्सपर्ट्स से बनेगी।

  • कमेटी पूरी तरह से सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और सीधी निगरानी में काम करेगी।
  • अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी (केंद्र की ओर से) और अमिकस क्यूरी के. परमेश्वर को चार सप्ताह के भीतर उपयुक्त नाम सुझाने का निर्देश दिया गया है।
  • अमिकस क्यूरी को अरावली की परिभाषा पर एक विस्तृत नोट भी चार हफ्ते में दाखिल करना होगा।

कोर्ट ने जोर देकर कहा कि यह मामला कोई सामान्य प्रतिद्वंद्वी (adversarial) मुकदमा नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य अरावली के पारिस्थितिक संतुलन को बचाना है। ‘जंगलों’ और ‘अरावली’ की परिभाषा को अलग-अलग जांचने की आवश्यकता बताई गई, क्योंकि दोनों अलग-अलग पर्यावरणीय चिंताएं उठाते हैं।

सुनवाई में प्रमुख बिंदु और चिंताएं

  • राजस्थान के किसानों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन ने बताया कि जस्टिस ओका बेंच के 2024 के आदेशों के बावजूद खनन पट्टे जारी हो रहे हैं और पेड़ काटे जा रहे हैं। उन्होंने तत्काल रोक की मांग की।
  • मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने चिंता जताते हुए कहा, “अवैध खनन रोकना जरूरी है। अधिकारियों को अपनी मशीनरी लगानी होगी, वरना ऐसे हालात बनेंगे जिन्हें सुधारना संभव नहीं होगा।”
  • कोर्ट ने स्पष्ट किया कि छिटपुट स्थानों पर भी अवैध खनन की खबरें हैं, लेकिन राजस्थान सरकार ने आश्वासन दिया कि कोई क्रमिक मुकदमेबाजी नहीं है और पूरी रोक लगाई जाएगी।

अगली सुनवाई अमिकस क्यूरी के नोट और नामों के सुझाव के बाद चार सप्ताह बाद होगी। यह फैसला दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, हरियाणा और गुजरात के लिए प्राकृतिक ढाल मानी जाने वाली अरावली को बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जहां अवैध खनन से जलवायु संतुलन, जल स्रोत और जैव विविधता पर गहरा खतरा मंडरा रहा है।