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सोनम वांगचुक: लद्दाख के पर्यावरण योद्धा की गिरफ्तारी ने मचाई सनसनी, आंदोलन तेज!

लेह/जोधपुर | लद्दाख के मशहूर पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार एक गंभीर वजह से। लद्दाख को छठी अनुसूचि और राज्य का दर्जा दिलाने के लिए चल रहे आंदोलन के बीच हिंसक प्रदर्शन के बाद उनकी गिरफ्तारी ने पूरे क्षेत्र में हलचल मचा दी है। राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लिए गए वांगचुक को जोधपुर जेल में शिफ्ट किया गया है, जहां उनकी रिहाई की मांग तेज हो गई है। आइए, इस सनसनीखेज घटनाक्रम की गहराई में झांकते हैं।

हिंसक प्रदर्शन और गिरफ्तारी का तूफान

24 सितंबर 2025 को लेह में छठी अनुसूचि की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया, जिसमें 4 लोगों की मौत और 90 से अधिक घायल हुए। इस घटना के बाद सोनम वांगचुक को NSA के तहत हिरासत में लिया गया। लद्दाख DGP एस.डी. सिंह ने दावा किया कि वांगचुक का एक पाकिस्तानी सम्मेलन में भाग लेना संदिग्ध है, जिसे सरकार ने उनकी गिरफ्तारी का आधार बनाया। हालांकि, 30 सितंबर को वायरल हुआ एक वीडियो—जिसे PIB ने डीपफेक करार दिया—में DGP को रक्षा मंत्री के कथित निर्देश पर बिना सबूत गिरफ्तारी की बात कहते दिखाया गया। यह वीडियो फर्जी होने का दावा होने के बावजूद विवादों को हवा दे रहा है।

परिवार और समर्थकों की बगावत

वांगचुक की पत्नी गितांजलि आंगमो ने सोशल मीडिया पर मोर्चा संभाला है। उन्होंने पीएम मोदी की बांग्लादेश नेता मुहम्मद यूनुस से मुलाकात की तस्वीर शेयर कर सवाल उठाया, “अगर पीएम को यूनुस से मिलना जायज है, तो वांगचुक को क्यों निशाना बनाया जा रहा?” गितांजलि ने स्पष्ट किया कि वांगचुक के सभी विदेशी दौरों, जिसमें पाकिस्तान का क्लाइमेट सम्मेलन भी शामिल है, विश्वविद्यालयों के निमंत्रण पर हुए थे, जहां उन्होंने पर्यावरण और पीएम की नीतियों की तारीफ की। लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस ने उनकी तत्काल रिहाई की मांग की, वहीं दिल्ली में प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने का आरोप लगाया।

पर्यावरण और आंदोलन का सफर

सोनम वांगचुक रेमन मैगसेसे पुरस्कार विजेता हैं, जिन्होंने लद्दाख के हिमालयी ग्लेशियरों की रक्षा और सड़क-बिजली परियोजनाओं के पर्यावरणीय प्रभाव पर आवाज उठाई। 2024 में उन्होंने 16 दिन का अनशन किया, जो 23 अक्टूबर को खत्म हुआ, लेकिन मई 2025 में सरकार के साथ समझौता टूट गया। फरवरी 2025 में उन्होंने पीएम को पत्र लिखकर ग्लेशियरों की स्थिति जांचने का आग्रह किया और अमेरिका में खारदुंगला ग्लेशियर का बर्फ का टुकड़ा दिखाकर जलवायु चेतावनी दी। दिसंबर 2024 में वे किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल से मिले, जो उनके संघर्ष को और मजबूती देता है।

वर्तमान हालात और भविष्य

वांगचुक की गिरफ्तारी ने लद्दाख में तनाव को बढ़ा दिया है। केंद्र सरकार बातचीत की पेशकश कर रही है, लेकिन प्रदर्शनकारी उनकी रिहाई तक शांत नहीं होंगे। पीबीएम अस्पताल, जोधपुर में उनकी सेहत पर नजर रखी जा रही है, जहां से ताजा अपडेट का इंतजार है। [आपका न्यूज़ पोर्टल का नाम] इस घटनाक्रम की हर कड़ी को आपके सामने लाता रहेगा—हमारे साथ बने रहें!

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