सोनम वांगचुक जोधपुर जेल में पिछले 110 दिनों से अधिक समय से राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत नजरबंद हैं और आज उनकी रिहाई की मांग ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। राजस्थान की सूर्य नगरी जोधपुर में आज सुबह से ही गहमागहमी का माहौल रहा, जब ‘भारतीय भीम सेना’ के सैकड़ों कार्यकर्ता लद्दाख के इस चर्चित जलवायु कार्यकर्ता के समर्थन में सड़कों पर उतर आए।
जोधपुर में भीम सेना का ‘हल्ला बोल’ और सुरक्षा इंतज़ाम
आज दोपहर जोधपुर के मसूरिया क्षेत्र से सोनम वांगचुक जोधपुर जेल की ओर एक विशाल विरोध रैली निकाली गई। प्रदर्शनकारियों के हाथों में तिरंगा और वांगचुक की रिहाई की मांग वाली तख्तियां थीं। भीम सेना के नेताओं ने आरोप लगाया कि सोनम वांगचुक जैसे देशभक्त और पर्यावरणविद् को जेल में रखना लोकतंत्र की हत्या है।
प्रशासन को इस प्रदर्शन की भनक पहले ही लग गई थी, जिसके कारण रातानाडा थानाधिकारी के नेतृत्व में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। सेंट्रल जेल के मुख्य द्वारों और जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर सुरक्षा घेरा इतना कड़ा था कि प्रदर्शनकारियों को काफी दूर ही रोक लिया गया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हल्की धक्का-मुक्की भी हुई, लेकिन स्थिति नियंत्रण में रही ।
सोनम वांगचुक जोधपुर जेल के भीतर: एक ‘नागरिक वैज्ञानिक’ का अवतार
भले ही वांगचुक को बाहरी दुनिया से काट दिया गया है, लेकिन सोनम वांगचुक जोधपुर जेल के भीतर भी शांत नहीं बैठे हैं। उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, वांगचुक अपनी बैरक को ही एक छोटी प्रयोगशाला में बदल चुके हैं:
- तापमान और वास्तुकला पर प्रयोग: वांगचुक ने जेल प्रशासन और सुप्रीम कोर्ट से थर्मामीटर और अन्य वैज्ञानिक उपकरणों की मांग की है। वे जेल की पुरानी पत्थर की बैरकों के थर्मल प्रदर्शन (Thermal Performance) का अध्ययन कर रहे हैं ताकि वे ऐसे सुझाव दे सकें जिससे ये बैरक बिना बिजली के गर्मियों में ठंडे और सर्दियों में गर्म रह सकें ।
- चींटियों का सामाजिक अध्ययन: एकांत कारावास में वांगचुक अपने बैरक के पास चींटियों की एक कॉलोनी का अवलोकन कर रहे हैं। वे उनके बीच की एकजुटता और टीम भावना से प्रभावित होकर उन पर अध्ययन कर रहे हैं और इसके लिए उन्होंने ‘Ants: Workers of the World’ नामक पुस्तक भी मंगवाई है ।
- ‘फॉरएवर पॉजिटिव’ पुस्तक का लेखन: जेल के अनुभवों और अपने दार्शनिक विचारों को संकलित करते हुए वे ‘फॉरएवर पॉजिटिव’ (Forever Positive) शीर्षक से एक नई पुस्तक लिख रहे हैं ।
- जेल स्टाफ के लिए ‘पैरेंटिंग गुरु’: जेल के वार्डन और पुलिसकर्मी भी वांगचुक के व्यक्तित्व से इतने प्रभावित हैं कि वे अक्सर अपने बच्चों की शिक्षा और परवरिश को लेकर उनसे सलाह लेने पहुँचते हैं ।
कानूनी लड़ाई: 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट पर टिकी नज़रें
सोनम वांगचुक जोधपुर जेल से कब बाहर आएंगे, इसका फैसला अब देश की सबसे बड़ी अदालत के हाथों में है। उनकी पत्नी द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका पर उच्चतम न्यायालय में 29 जनवरी 2026 को महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है ।
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में दलील दी है कि वांगचुक की नजरबंदी पूरी तरह से ‘दुर्भावनापूर्ण’ है। उन्होंने तर्क दिया कि प्रशासन ने वांगचुक के उन वीडियो संदेशों को छिपाया जिनमें वे शांति की अपील कर रहे थे। साथ ही, नजरबंदी के आधार प्रदान करने में 28 दिनों की देरी हुई, जो राष्ट्रीय सुरक्षा कानून की धारा 8 का खुला उल्लंघन है ।
गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि और लद्दाख का संघर्ष
बता दें कि सितंबर 2025 में लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) में शामिल करने की मांग को लेकर लेह में हिंसक झड़पें हुई थीं। इस हिंसा में चार युवाओं की जान चली गई थी। प्रशासन का आरोप है कि वांगचुक के भड़काऊ भाषणों ने युवाओं को उकसाया, जबकि वांगचुक का कहना है कि यह युवाओं का बेरोजगारी और वादों के टूटने के खिलाफ स्वतःस्फूर्त गुस्सा था । इसी के बाद 26 सितंबर 2025 को उन्हें गिरफ्तार कर लद्दाख से 1600 किलोमीटर दूर जोधपुर भेज दिया गया था 。
आज का प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि सोनम वांगचुक जोधपुर जेल में भले ही बंद हों, लेकिन उनके समर्थन की लहर अब लद्दाख की सीमाओं को पार कर राजस्थान और पूरे देश में फैल चुकी है। विपक्ष के नेता उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती ने भी इस गिरफ्तारी को ‘लोकतांत्रिक असहमति पर हमला’ करार दिया है ।
