राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल में फर्जी मार्कशीट का सनसनीखेज घोटाला, 3 साल में 50 से ज्यादा फर्जीवाड़े का खुलासा

स्टूडेंट्स की डिटेल्स बदलकर नए नामों से जारी कीं मार्कशीट्स, ध्रुव को कोमल और पंकज को पारुल बनाने का खेल उजागर

जयपुर | राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल (RSOS) में एक चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है, जहां पिछले तीन वर्षों में 50 से अधिक मार्कशीट्स में हेरफेर कर उन्हें नए नामों, फोटो और जेंडर के साथ जारी किया गया। इस घोटाले ने शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जयपुर के बजाज नगर थाने में दर्ज शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है, जिसमें एक संविदाकर्मी राकेश कुमार शर्मा को मुख्य आरोपी के रूप में पकड़ा गया है।

घोटाले का खुलासा: यह मामला तब सामने आया जब 2019-20 सत्र की एक मार्कशीट, जो मूल रूप से दीपक नाम के एक छात्र की थी, को संशोधित कर शालिनी नाम की एक छात्रा के नाम से जारी किया गया। जांच में पता चला कि यह कोई इकलौता मामला नहीं था। पिछले तीन सालों में 50 से अधिक मार्कशीट्स में इस तरह की हेराफेरी की गई, जिसमें छात्रों के नाम, माता-पिता के नाम, जन्मतिथि, और यहाँ तक कि जेंडर भी बदल दिए गए। उदाहरण के लिए, ध्रुव जैन (एनरोलमेंट नंबर 30023223320) को कोमल गहलोत, पंकज उदानिया (एनरोलमेंट नंबर 12281185072) को पारुल बाला, और फिरदौस (एनरोलमेंट नंबर 2091223036) को रोहित के नाम से मार्कशीट्स जारी की गईं। इस फर्जीवाड़े ने न केवल शिक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर किया, बल्कि हजारों छात्रों के भविष्य पर भी सवाल खड़े कर दिए।

कैसे हुआ फर्जीवाड़ा?: जांच से पता चला कि यह घोटाला मुख्य रूप से संविदाकर्मी राकेश कुमार शर्मा की एसएसओ आईडी (RKS4161) के माध्यम से अंजाम दिया गया। राकेश ने पुरानी मार्कशीट्स में डिजिटल हेरफेर कर उन्हें नए नामों और विवरणों के साथ अपलोड किया। हैरानी की बात यह है कि सिस्टम में मूल मार्कशीट्स हट गईं, और फर्जी मार्कशीट्स उनकी जगह लेती गईं। इसके अलावा, 1440 नामांकनों की जांच में 400 छात्रों को गलत तरीके से पास किया गया, और 2025 में 162 संशोधन किए गए, जिनमें से 20 संशोधन एक शैक्षिक अधिकारी की चोरी की गई आईडी और पासवर्ड के जरिए किए गए। यह भी सामने आया कि पिछले सत्रों के डेटा में संशोधन की अनुमति केवल छात्र सहायता सेवा अनुभाग को थी, लेकिन राकेश को यह एक्सेस गैरकानूनी रूप से प्राप्त हुआ।

पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई: राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल के सहायक निदेशक उमेश कुमार शर्मा ने जयपुर के बजाज नगर थाने में इस मामले की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने रिकॉर्ड जब्त कर जांच शुरू की है, जिसमें यह पता लगाया जा रहा है कि यह फर्जीवाड़ा कब से चल रहा था, कितने लोग इसमें शामिल थे, और कितने छात्रों ने वास्तव में परीक्षा दी थी। स्कूल की सचिव अरुणा शर्मा ने बताया कि मामला सामने आते ही जांच शुरू कर दी गई, और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या यह फर्जीवाड़ा केवल एक संविदाकर्मी का काम था, या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है।

स्थानीय और सामाजिक प्रभाव: इस घोटाले ने न केवल राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं, बल्कि उन छात्रों के भविष्य को भी खतरे में डाल दिया है, जो इस संस्था से शिक्षा प्राप्त करने की उम्मीद में शामिल हुए थे। स्थानीय अभिभावकों और छात्रों में गुस्सा है, क्योंकि ऐसी फर्जी मार्कशीट्स का उपयोग नौकरियों और उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए हो सकता है, जिससे ईमानदार छात्रों के अवसर छिन सकते हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि इस मामले की गहन जांच हो और दोषियों को कड़ी सजा दी जाए।

पृष्ठभूमि और संदर्भ: राजस्थान में पहले भी भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और डमी अभ्यर्थियों के मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन ओपन स्कूल में इस तरह का फर्जीवाड़ा एक नया और गंभीर मुद्दा है। राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल उन छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है, जो नियमित स्कूलों में पढ़ाई नहीं कर पाते। इस तरह के घोटाले इस प्रणाली के उद्देश्य को ही कमजोर करते हैं। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में फर्जी मार्कशीट्स के लिए लाखों रुपये में सौदे किए गए, जिससे इस घोटाले की गंभीरता और बढ़ जाती है।

आगे की दिशा: पुलिस और स्कूल प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं। 2017 से 2022 तक के सभी नामांकनों और मार्कशीट्स की जांच की जा रही है। इसके साथ ही, यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल सिस्टम में पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ाने की जरूरत है, ताकि इस तरह के हेरफेर को रोका जा सके।

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