राजस्थान

श्रीगंगानगर: नहर के पानी में बहकर आई ‘मानवता’ की लाश, खेत में सिंचाई कर रहे किसान के पैरों तले खिसकी जमीन

सादुलशहर (श्रीगंगानगर) | 19 जनवरी की सुबह जब पूरा इलाका घने कोहरे और सर्दी की चपेट में था, तब राजस्थान के ‘अन्न के कटोरे’ कहे जाने वाले श्रीगंगानगर जिले में एक ऐसी घटना घटी जिसने हर संवेदनशील इंसान की रूह कंपा दी. सादुलशहर क्षेत्र में एक किसान के खेत में पानी के साथ बहकर एक नवजात बच्ची की लाश आ पहुंची. यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि हमारे समाज के माथे पर लगा वह बदनुमा दाग है जो मिटने का नाम नहीं ले रहा.

सिंचाई के दौरान सामने आया भयानक सच

मामला सादुलशहर पुलिस थाना क्षेत्र का है. यहाँ के एक स्थानीय किसान, चम कौर सिंह, अपने खेत में रबी की फसल की सिंचाई कर रहे थे. राजस्थान में नहरी पानी की ‘वाराबंदी’ (बारी) बेहद कीमती होती है, इसलिए किसान पूरी मुस्तैदी से खेत में मौजूद थे. पानी एसडीएस (SDS) नहर से होते हुए उनके खेत के खाले (छोटी नाली) में आ रहा था.   

अचानक, चम कौर सिंह ने देखा कि पानी का बहाव रुक सा गया है. जब उन्होंने पास जाकर देखा, तो वहां कोई मामूली कचरा नहीं, बल्कि एक नवजात बच्ची का शव फंसा हुआ था. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बच्ची को देखकर ऐसा लग रहा था कि उसका जन्म हाल ही में हुआ है और उसे सुनियोजित तरीके से नहर में फेंका गया है.   

पुलिस की त्वरित कार्रवाई और चुनौतियां

घटना की सूचना मिलते ही सादुलशहर थाना प्रभारी (SHO) मलकीत सिंह अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे. पुलिस ने तुरंत शव को कब्जे में लेकर सरकारी अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया है.   

पुलिस के सामने इस केस को सुलझाने में कई बड़ी चुनौतियां हैं:

  1. क्राइम सीन का अभाव: शव नहर में बहकर आया है, जिसका मतलब है कि अपराध सादुलशहर में नहीं, बल्कि नहर के बहाव वाले क्षेत्र (Upstream) में कहीं और हुआ है. चूंकि यह नहर पंजाब से आती है, इसलिए आशंका जताई जा रही है कि आरोपी पंजाब के किसी सीमावर्ती गांव का भी हो सकता है.
  2. सुरागों का मिटना: पानी में रहने के कारण उंगलियों के निशान और अन्य फॉरेंसिक सबूतों के मिटने का खतरा बना रहता है. हालांकि, पुलिस आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और हाल ही में हुई प्रसूतियों (Deliveries) का रिकॉर्ड चेक कर रही है.

‘अवांछित बेटियों’ का कब्रिस्तान बनती नहरें?

यह घटना अकेली नहीं है. पिछले कुछ समय में उत्तर भारत की नहरों में शव मिलने का सिलसिला बढ़ा है. चाहे वह कुरुक्षेत्र में एक पिता द्वारा अपनी ही बेटी को नहर में फेंकने का मामला हो , या फिर भीलवाड़ा में नवजात को जिंदा दफनाने की क्रूरता —ये सभी घटनाएं इशारा करती हैं कि ‘बेटी बचाओ’ के नारों के बीच जमीनी हकीकत आज भी डरावनी है.   

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में अक्सर ‘लोक-लाज’ या ‘बेटा न होने की कुंठा’ मुख्य कारण होते हैं. अपराधी नहर को शव निस्तारण का सबसे आसान जरिया मानते हैं क्योंकि बहता पानी उनके पाप और सबूत, दोनों को दूर बहा ले जाता है.

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