राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र में एक अलग ही नजारा देखने को मिला. बाड़मेर से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी राशन गेहूं की गुणवत्ता को लेकर खाद्य मंत्री सुमित गोदारा से सीधे भिड़ गए. इसे महज एक सवाल-जवाब कहना गलत होगा; यह सदन में एक ‘वार’ जैसा माहौल था. भाटी ने सरकार से सीधा सवाल दागा—क्या गरीबों की थाली में परोसा जाने वाला गेहूं उनकी जान ले रहा है?
रविंद्र सिंह भाटी और मंत्री सुमित गोदारा के बीच हुई इस तीखी नोकझोंक ने पूरे प्रदेश का ध्यान खींचा है. आइए जानते हैं इस ‘जुबानी जंग’ की पूरी कहानी.
युवा विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने अपने आक्रामक तेवर दिखाते हुए सदन को हिला दिया. उन्होंने कहा कि पश्चिमी राजस्थान में यह ‘परसेप्शन’ (धारणा) बन चुका है कि सरकार राशन के नाम पर लोगों को बीमार कर रही है. रविंद्र सिंह भाटी राशन गेहूं की ‘क्वालिटी’ पर सवाल उठाते हुए मंत्री सुमित गोदारा को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया.
भाटी ने सदन में ललकारते हुए कहा:
“एक आम धारणा बन चुकी है कि ये जो गेहूं आप दे रहे हैं, इससे कई डिजीज जैसे कैंसर और तमाम रोग बढ़ रहे हैं. सरकार केवल पेट भरने की गिनती न गिनाए, यह बताए कि अनाज में जहर तो नहीं है?”
उनका इशारा साफ था—पंजाब और हरियाणा से आने वाला ‘कीटनाशक युक्त’ अनाज, जिसे लेकर जनता में भारी आक्रोश और डर है.
भाटी के इस हमले पर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा भी चुप नहीं बैठे. उन्होंने रविंद्र सिंह भाटी राशन गेहूं वाले आरोपों पर करारा पलटवार किया. गोदारा ने भाटी को चुनौती देते हुए कहा कि बिना सबूत के जनता में पैनिक न फैलाएं.
सुमित गोदारा ने गुस्से और तर्क के मिश्रण के साथ जवाब दिया:
“आप यह कैंसर का सर्वे पता नहीं कहां से लेकर आए हो? मेरे पिताजी स्वयं कैंसर स्पेशलिस्ट (डॉक्टर) हैं. हमने अपने जीवन में कभी नहीं सुना कि कनक (गेहूं) खाने से किसी को कैंसर होता है.”
सरकार ने दावा किया कि एफसीआई (FCI) का गेहूं मानकों पर खरा है और एनएफएसए (NFSA) के तहत बेहतरीन अनाज दिया जा रहा है.
भले ही मंत्री सुमित गोदारा ने आरोपों को खारिज कर दिया हो, लेकिन रविंद्र सिंह भाटी राशन गेहूं मुद्दे पर जो ‘वार’ कर रहे हैं, उसके पीछे ठोस वजहें हैं.
इस ‘वार’ के बीच मंत्री गोदारा ने बाड़मेर के आंकड़े ढाल के रूप में पेश किए.
विधानसभा में रविंद्र सिंह भाटी राशन गेहूं पर हुई यह बहस सिर्फ नेताओं की तू-तू मैं-मैं नहीं है. भाटी ने एक डरी हुई जनता की आवाज उठाई, तो मंत्री गोदारा ने सिस्टम का बचाव किया.
असली जीत तब होगी जब सरकार मंत्री के व्यक्तिगत दावे (“मेरे पिता डॉक्टर हैं”) से आगे बढ़कर, राशन डिपो के गेहूं की लैब टेस्टिंग करवाएगी और रिपोर्ट सार्वजनिक करेगी. तब तक, यह सवाल कायम रहेगा—क्या वाकई राशन का गेहूं सुरक्षित है?
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