हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी क्षेत्र में निर्माणाधीन एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर जारी किसान आंदोलन दिन-ब-दिन उग्र होता जा रहा है। अब यह विवाद सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसकी गूंज लोकसभा तक पहुंच चुकी है। इसी बीच किसान नेताओं ने ऐलान किया है कि आगामी 17 दिसंबर को हनुमानगढ़ जिला कलेक्ट्रेट पर एक बड़ी महापंचायत आयोजित की जाएगी, जिसमें किसान नेता राकेश टिकैत भी शामिल होंगे।
पूर्व विधायक बलवान पूनिया ने बताया कि राकेश टिकैत के साथ कई प्रमुख किसान यूनियनें व सामाजिक संगठन महापंचायत में हिस्सा लेंगे। उन्होंने कहा कि जब तक किसानों की मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक एथेनॉल फैक्ट्री के खिलाफ आंदोलन जारी रहेगा।
किसानों का कहना है कि यह फैक्ट्री क्षेत्र के भूजल, मिट्टी और पर्यावरण पर गंभीर असर डाल सकती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने उनकी आपत्तियों को सुने बिना ही फैक्ट्री निर्माण की मंज़ूरी दे दी।
गुरुवार (11 दिसंबर) को किसान जब अगली बैठक के लिए इकट्ठा हो रहे थे, पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बावजूद कई ग्रामीण टिब्बी में जुटे और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताया। प्रशासन लगातार किसानों से संवाद बना रहा है।
सादुलशहर के विधायक गुरवीर सिंह बराड़ ने भी टिब्बी पहुँचकर किसानों और महिलाओं से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि किसानों की सभी मांगों को लिखित रूप में लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के समक्ष रखा जाएगा ताकि जल्द से जल्द समाधान निकाला जा सके।
राठीखेड़ा गांव में हुई आगजनी और हिंसा की घटना के बाद शुक्रवार (12 दिसंबर) को तीसरे दिन भी इंटरनेट सेवाएँ बंद रहीं। पुलिस बल और होमगार्ड की टुकड़ियाँ फैक्ट्री परिसर और आसपास के इलाकों में तैनात हैं। हालांकि, स्थिति अब नियंत्रण में है और इलाके में शांति बनी हुई है।
अतिरिक्त महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) वी.के. सिंह ने बताया कि घटना के बाद 100 से अधिक लोगों पर केस दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि बुधवार को हुई हिंसा के दौरान पुलिस और होमगार्ड के करीब तीन दर्जन जवान घायल हुए। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि कुछ बाहरी तत्वों ने स्थानीय प्रदर्शनकारियों को उकसाया था।
घटना को लेकर प्रशासन के खिलाफ भी जन आक्रोश देखा जा रहा है। जिला कलेक्टर और एसपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने लोकसभा में यह मामला उठाते हुए कहा था कि दोनों अधिकारियों को एपीओ (Awaiting Posting Order) किया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि सरकार ने किसानों की आवाज दबाने के लिए दमनकारी रवैया अपनाया।
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