जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकारी स्कूलों के जर्जर भवनों पर राज्य सरकार के एक्शन प्लान को खारिज कर दिया। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि 86 हजार कमरों की मरम्मत का रोडमैप अधूरा है। झालावाड़ स्कूल हादसे के मामले में सुनवाई के दौरान जस्टिस महेंद्र गोयल और जस्टिस अशोक कुमार जैन की खंडपीठ ने सरकार को नया और समग्र प्लान तैयार कर दोबारा पेश करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने फटकार लगाई: “चुनावी वादों के हिसाब से नहीं, धरातल पर काम करें। 2047 का विजन बताते हैं, लेकिन कल की प्लानिंग भी नहीं है।”
हाईकोर्ट का सख्त रुख: प्लान में 86 हजार कमरों का जिक्र क्यों नहीं?
गुरुवार (6 नवंबर 2025) को हुई सुनवाई में खंडपीठ ने सरकार के प्रस्तुत रोडमैप पर असंतोष जताया। सर्वे के अनुसार राज्य के सरकारी स्कूलों में करीब 86 हजार कमरे जर्जर हालत में हैं, लेकिन प्लान में इनकी मरम्मत का कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं है। कोर्ट ने पूछा:
- सीमित समय में इतने बड़े पैमाने पर मरम्मत कैसे होगी?
- सभी जर्जर भवनों को कवर करने का कोई समग्र प्लान क्यों नहीं?
खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के अविनाश मेहरोत्रा बनाम भारत सरकार के फैसले का हवाला दिया, जिसमें नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट गाइडलाइन फॉर स्कूल सेफ्टी-2016 का पालन अनिवार्य बताया गया है। कोर्ट ने सरकार से पूछा कि क्या वर्तमान स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर इन गाइडलाइनों के अनुरूप है? सरकार को एफिडेविट दाखिल कर स्पष्ट करना होगा।
NCPCR की मौजूदगी में कोर्ट की नाराजगी
सुनवाई में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की ओर से एडवोकेट वागीश सिंह उपस्थित हुए। उन्होंने बताया:
“कोर्ट ने राज्य सरकार के जवाब पर नाराजगी जाहिर की। अदालत ने साफ कहा कि रिपोर्ट दोबारा पेश करें और बताएं कि सीमित समय में इन भवनों की मरम्मत कैसे होगी।”
झालावाड़ हादसे ने खोला आंखें, सुप्रीम कोर्ट का पुराना आदेश
यह मामला झालावाड़ में स्कूल भवन ढहने के हादसे से जुड़ा है, जिसमें बच्चों की जान को खतरा पैदा हो गया था। सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में ही सभी राज्यों को स्कूल सेफ्टी पॉलिसी लागू करने का आदेश दिया था। राजस्थान सरकार को अब एफिडेविट देकर बताना होगा कि भवनों के निर्माण और मरम्मत में यह गाइडलाइन फॉलो हो रही है या नहीं।
अगली सुनवाई 24 नवंबर को
मामले की अगली सुनवाई 24 नवंबर 2025 को होगी। तब तक सरकार को नया एक्शन प्लान तैयार कर पेश करना होगा। शिक्षा विभाग पर सवाल उठ रहे हैं कि जर्जर भवनों से बच्चों की सुरक्षा को खतरा क्यों बरकरार है?
