जयपुर | राजस्थान में दक्षिण-पश्चिमी मानसून पिछले 28 दिनों से सक्रिय है, जिसके चलते बारिश और बाढ़ जैसे हालात कई क्षेत्रों में बने हुए हैं। इस बीच, शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों और शिक्षकों की जान-माल की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शिक्षा विभाग के शासन सचिव कृष्ण कुणाल ने सभी संभागीय संयुक्त निदेशकों और मुख्य जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं, जिसमें ग्राम पंचायत प्रारंभिक शिक्षा अधिकारियों (पीईईओ) और शहरी संकुल प्रारंभिक शिक्षा अधिकारियों (यूसीईईओ) से उनके क्षेत्र के सभी स्कूलों की सुरक्षा का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने को कहा गया है। यह कदम मानसून के दौरान स्कूल भवनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसी भी अनहोनी को रोकने के लिए उठाया गया है।
शिक्षा विभाग के शासन सचिव कृष्ण कुणाल ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि सभी पीईईओ और यूसीईईओ को अपने क्षेत्र के तहत आने वाले प्रत्येक स्कूल का निरीक्षण करना होगा। इस निरीक्षण के बाद उन्हें एक प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा, जिसमें निम्नलिखित बिंदुओं की पुष्टि हो:
यह प्रमाण पत्र संभागीय संयुक्त निदेशकों और मुख्य जिला शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से जमा कराया जाएगा, जो यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी स्कूल भवन मानसून की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हैं।
राजस्थान में मानसून के दौरान भारी बारिश, बाढ़, और भूस्खलन जैसी घटनाएं कई क्षेत्रों में देखी जाती हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कई सरकारी स्कूल पुराने भवनों में संचालित होते हैं, जिनमें दरारें, रिसाव, या कमजोर संरचना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में भारी बारिश के दौरान भवन ढहने या अन्य दुर्घटनाओं का खतरा रहता है, जो विद्यार्थियों और शिक्षकों की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। शिक्षा विभाग का यह निर्देश सुनिश्चित करता है कि सभी स्कूल भवन मानसून के लिए तैयार हों और किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
शिक्षा विभाग ने इस बार मानसून की शुरुआत से पहले ही स्कूलों की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बरतनी शुरू कर दी थी। पिछले वर्षों में मानसून के दौरान स्कूल भवनों में रिसाव, बिजली की खराबी, और दीवारों में दरार जैसी समस्याएं सामने आई थीं, जिसके बाद विभाग ने इस बार पहले से तैयारी करने का निर्णय लिया। शासन सचिव कृष्ण कुणाल ने अपने निर्देश में जोर दिया है कि यह प्रमाण पत्र केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह एक जिम्मेदारी है, जिसका पालन हर स्तर पर गंभीरता से किया जाना चाहिए।
आदेश के अनुसार, पीईईओ और यूसीईईओ को अपने क्षेत्र के सभी स्कूलों का भौतिक निरीक्षण करना होगा। इसमें भवन की संरचनात्मक मजबूती, छत की स्थिति, बिजली और पानी की व्यवस्था, और आपातकालीन निकास जैसे पहलुओं की जांच शामिल है। यदि किसी स्कूल में कोई कमी पाई जाती है, तो उसे तुरंत ठीक करने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी। यह प्रमाण पत्र जमा करने की समय सीमा जल्द ही निर्धारित की जाएगी, जिसके बाद संयुक्त निदेशक और जिला शिक्षा अधिकारी इसकी समीक्षा करेंगे।
इस पहल ने शिक्षा विभाग की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी को दर्शाया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई अभिभावकों और शिक्षकों ने इस कदम की सराहना की है। एक यूजर ने लिखा, “मानसून में स्कूलों की सुरक्षा को लेकर शिक्षा विभाग का यह कदम स्वागत योग्य है। बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है।” हालांकि, कुछ लोगों ने मांग की है कि पुराने स्कूल भवनों का पुनर्निर्माण और नियमित रखरखाव भी सुनिश्चित किया जाए, ताकि ऐसी जांच की जरूरत ही न पड़े।
हालांकि शिक्षा विभाग का यह निर्देश एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इसके कार्यान्वयन में कई चुनौतियां भी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कई स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी है, और मानसून से पहले मरम्मत कार्यों के लिए पर्याप्त बजट और समय की जरूरत होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि विभाग को दीर्घकालिक योजना बनानी चाहिए, जिसमें स्कूल भवनों का नियमित निरीक्षण और नवीनीकरण शामिल हो। साथ ही, शिक्षकों और कर्मचारियों को आपातकालीन स्थिति में बच्चों की सुरक्षा के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाना चाहिए।
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