बीकानेर में कर्मचारियों की जोरदार हड़ताल, केंद्र सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन

जिला कलेक्टर कार्यालय के सामने उमड़ा कर्मचारियों का सैलाब, मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन

बीकानेर | बीकानेर सहित पूरे देश में 9 जुलाई 2025 को बैंक, बीमा, डाकघर और रोडवेज कर्मचारियों ने केंद्र सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर हड़ताल की। बीकानेर में इस आंदोलन ने जोर पकड़ा, जहां सैकड़ों कर्मचारी दोपहर 12 बजे जिला कलेक्टर कार्यालय के सामने एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी और धरने के माध्यम से अपनी मांगों को बुलंद किया, जिसमें श्रमिक हितों की रक्षा, बेहतर वेतनमान, और कार्यस्थल पर सुधारों की मांग प्रमुख थी।

आंदोलन का स्वरूप: हड़ताल का आह्वान विभिन्न कर्मचारी यूनियनों और संगठनों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था। बीकानेर में बैंक कर्मचारी यूनियन, बीमा कर्मचारी संगठन, डाक विभाग कर्मचारी संघ, और रोडवेज कर्मचारी संगठन इस आंदोलन में शामिल रहे। कर्मचारियों ने केंद्र सरकार की नीतियों को “श्रमिक विरोधी” करार देते हुए दावा किया कि ये नीतियां उनकी आजीविका और अधिकारों को कमजोर कर रही हैं। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने “श्रमिक हितों की रक्षा करो” और “केंद्र सरकार होश में आओ” जैसे नारे लगाए।

प्रदर्शन का केंद्र: जिला कलेक्टर कार्यालय के सामने आयोजित इस प्रदर्शन में कर्मचारी नेताओं ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें शीघ्र पूरी नहीं की गईं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। कर्मचारियों ने एक ज्ञापन भी जिला प्रशासन को सौंपा, जिसमें उनकी प्रमुख मांगों को रेखांकित किया गया। इन मांगों में नई पेंशन योजना को वापस लेना, स्थायी रोजगार की गारंटी, और कार्यस्थल पर बेहतर सुविधाएं शामिल थीं।

जनजीवन पर प्रभाव: इस हड़ताल का असर बीकानेर में कई क्षेत्रों में देखा गया। बैंकों में लेनदेन ठप रहा, जिससे ग्राहकों को लंबी कतारों और असुविधा का सामना करना पड़ा। डाकघरों में सामान्य सेवाएं प्रभावित हुईं, और रोडवेज की बस सेवाओं में भी व्यवधान देखा गया। स्थानीय व्यापारियों और आम नागरिकों ने हड़ताल के कारण होने वाली परेशानियों को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ ने कर्मचारियों के समर्थन में आवाज उठाई, जबकि कुछ ने सेवाओं के ठप होने पर नाराजगी जताई।

नेताओं के बयान: हड़ताल का नेतृत्व कर रहे एक यूनियन नेता ने कहा, “केंद्र सरकार की नीतियां न केवल कर्मचारियों के लिए हानिकारक हैं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी कमजोर कर रही हैं। हमारी मांगें जायज हैं, और हम तब तक पीछे नहीं हटेंगे जब तक सरकार हमारी बात नहीं मानती।” वहीं, जिला प्रशासन ने प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बताया और कहा कि ज्ञापन को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा।

पृष्ठभूमि: यह हड़ताल देशव्यापी आंदोलन का हिस्सा थी, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के कर्मचारी संगठनों ने एकजुटता दिखाई। बीकानेर में इस तरह के प्रदर्शन पहले भी देखे गए हैं, लेकिन इस बार कर्मचारियों की एकजुटता और प्रदर्शन का व्यापक स्वरूप उल्लेखनीय रहा।

आगे की राह: कर्मचारी नेताओं ने संकेत दिया है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे भविष्य में और बड़े स्तर पर आंदोलन कर सकते हैं, जिसमें अनिश्चितकालीन हड़ताल भी शामिल हो सकती है। बीकानेर के नागरिकों और प्रशासन को इस स्थिति पर नजर रखने की जरूरत है।

लेखक: TharToday.com

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