राजस्थान

लूणकरणसर: 5 माह का ‘वनवास’ खत्म, ‘इंस्पेक्टर नंबर 6’ लाइन हुई दुरुस्त; मलकीसर पंपिंग स्टेशन फिर से शुरू

लूणकरणसर | थार टुडे (TharToday.com)

पश्चिमी राजस्थान की मरुगंगा कही जाने वाली इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) से जुड़े हजारों किसानों के लिए आज का दिन बड़ी राहत लेकर आया है। लूणकरणसर क्षेत्र में पिछले करीब पांच महीने से जल संकट का कारण बनी मलकीसर पंपिंग स्टेशन की विद्युत आपूर्ति आखिरकार बहाल कर दी गई है। पंपिंग स्टेशन की ‘लाइफलाइन’ मानी जाने वाली 33 केवी ‘इंस्पेक्टर संख्या 6’ लाइन के फाल्ट को दुरुस्त कर दिया गया है।

थार टुडे एक्सक्लूसिव: संयुक्त प्रयास रंग लाया

इस 33 केवी हाई-वोल्टेज लाइन में आए गंभीर फाल्ट के कारण मलकीसर पंपिंग स्टेशन ठप पड़ा था, जिससे क्षेत्र की सिंचाई और पेयजल व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी। थार टुडे को मिली जानकारी के अनुसार, यह सफलता बिजली विभाग के अधिकारियों, स्थानीय किसानों और किसान संगठनों के “संयुक्त प्रयास” (Joint Effort) का परिणाम है। प्रशासन और किसानों के बीच आपसी समन्वय ने उन नौकरशाही बाधाओं को दूर किया जो अक्सर सरकारी फाइलों में दब जाती हैं।

क्या था ‘इंस्पेक्टर नंबर 6’ का पेंच?

मलकीसर पंपिंग स्टेशन, जो कंवरसेन लिफ्ट नहर सिस्टम का एक अहम हिस्सा है, को चलाने के लिए भारी-भरकम मोटरों की जरूरत होती है। इन्हें बिजली देने का काम 33 केवी का एक डेडिकेटेड फीडर करता है। स्थानीय तौर पर ‘इंस्पेक्टर संख्या 6’ के नाम से चर्चित इस लाइन में तकनीकी खामी आ गई थी । सूत्रों के मुताबिक, 33 केवी जैसी लाइनों में बड़े फाल्ट के बाद उन्हें दोबारा चार्ज करने (Re-energize) के लिए ‘विद्युत निरीक्षक’ (Electrical Inspector) से वैधानिक मंजूरी (Statutory Clearance) लेनी पड़ती है । अक्सर कागजी कार्रवाई और निरीक्षण में लंबा वक्त लगता है, लेकिन इस बार किसानों के दबाव और ‘जन सहयोग’ मॉडल ने इस प्रक्रिया को गति दी, जिससे लाइन को समय पर क्लीयरेंस मिल सकी।   

5 महीने से बूंद-बूंद को तरस रहा था क्षेत्र

इस लाइन के बंद होने का असर सीधा लूणकरणसर की रबी और खरीफ की फसलों पर दिखा। मलकीसर स्टेशन से पानी लिफ्ट न होने के कारण:

  • सिंचाई संकट: मूंगफली और चने की फसलें बर्बाद होने की कगार पर थीं। मजबूरन किसानों को ट्यूबवेल के खारे पानी का उपयोग करना पड़ रहा था।
  • पेयजल किल्लत: मलकीसर स्टेशन न केवल खेतों को पानी देता है, बल्कि यह लूणकरणसर कस्बे और आसपास के गांवों के लिए पीने के पानी का मुख्य स्रोत भी है । लाइन बंद होने से ‘आपणी योजना’ जैसी सप्लाई प्रभावित हुई, जिससे लोगों को महंगे टैंकर मंगवाने पड़े।

भविष्य की राह: सौर ऊर्जा बनेगी विकल्प?

इस घटना ने ग्रिड पर हमारी निर्भरता की पोल भी खोल दी है। जानकारों का मानना है कि इसका स्थायी समाधान सौर ऊर्जा में छिपा है। जोधपुर डिस्कॉम (JdVVNL) अब पीएम-कुसुम (PM-KUSUM) योजना के तहत लूणकरणसर और छतरगढ़ जैसे क्षेत्रों में सब-स्टेशन स्तर पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने की दिशा में काम कर रहा है । यदि मलकीसर जैसे स्टेशनों के पास अपने सौर संयंत्र हों, तो भविष्य में ग्रिड फेल होने पर भी पानी की सप्लाई नहीं रुकेगी।   

फिलहाल, लाइन के जुड़ने और पंपों के शुरू होने से लूणकरणसर के किसानों के चेहरों पर रौनक लौट आई है। नहरों में पानी का प्रवाह फिर से शुरू होने के साथ ही क्षेत्र में उम्मीद की नई लहर दौड़ गई है।

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