राजस्थान

खाजूवाला अवैध लकड़ी तस्करी: 30 KYD से 365 हैड तक माफिया का ‘कॉरिडोर’, रक्षक बेबस

खाजूवाला अवैध लकड़ी तस्करी के बढ़ते मामलों ने राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा और पर्यावरण दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीकानेर जिले के खाजूवाला में इन दिनों वन संपदा की लूट का खेल ‘सिस्टम’ की नाक के नीचे चल रहा है। विशेष रूप से 30 केवाईडी (KYD) से शुरू होकर 365 हैड तक जाने वाली सड़क अब अवैध लकड़ी परिवहन की मुख्य ‘लाइफलाइन’ में तब्दील हो चुकी है। प्रतिदिन यहाँ से दर्जनों लकड़ी से लदे ट्रैक्टर-ट्रॉली, जिन्हें स्थानीय भाषा में ‘रेहड़े’ कहा जाता है, बिना किसी डर के दौड़ते देखे जा सकते हैं।

माफिया का दुस्साहस: अधिकारियों पर जानलेवा हमला

क्षेत्र में सक्रिय लकड़ी माफिया का खौफ इस कदर बढ़ गया है कि वे अब कानून को चुनौती देने से भी नहीं कतराते। खाजूवाला अवैध लकड़ी तस्करी को रोकने की कोशिश करने वाले वन विभाग के कर्मियों पर हमले की घटनाएं आम होती जा रही हैं। हाल ही में 36 के नहर क्षेत्र (153 से 165 हैड के बीच) में एक सनसनीखेज मामला सामने आया। वन विभाग की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर अवैध कटाई में प्रयुक्त एक जेसीबी (JCB) मशीन को जब्त किया था ।

जब विभाग के अधिकारी और होमगार्ड के जवान इस मशीन को खाजूवाला कार्यालय ले जा रहे थे, तब माफिया अनिल सियाग और उसके दो-तीन साथियों ने राजीव सर्कल के पास सरकारी काफिले को रोक लिया। तस्करों ने न केवल अधिकारियों के साथ बदसलूकी की, बल्कि जब्त जेसीबी के हाइड्रोलिक पंजे से अधिकारियों की गाड़ी को कुचलने का प्रयास किया और अंततः मशीन छीनकर फरार होने में सफल रहे । यह घटना दर्शाती है कि सीमावर्ती इलाकों में माफिया के हौसले कितने बुलंद हैं।

394 KGD और 30 KYD रूट पर सघन नेटवर्क

खाजूवाला अवैध लकड़ी तस्करी का जाल केवल मुख्य सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अंदरूनी चकों और नहरों तक फैला हुआ है। हाल ही में NDTV राजस्थान की एक रिपोर्ट के बाद वन विभाग ने कुछ सक्रियता दिखाई और 394 केजीडी (KGD) क्षेत्र में ग्रामीणों के सहयोग से बड़ी कार्रवाई की । वन रक्षक ओम प्रकाश सियाग और उनकी टीम ने मौके से अवैध लकड़ी से लदे दो बड़े ट्रैक्टरों को पकड़कर नर्सरी डिपो में खड़ा करवाया है ।

हालांकि, स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग की यह कार्रवाई केवल ऊपरी स्तर की है। 30 केवाईडी से 365 हैड का मार्ग रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मार्ग विभिन्न कृषि क्षेत्रों और गुप्त रास्तों को जोड़ता है, जिससे तस्करों को मुख्य चौकियों से बच निकलने में आसानी होती है । यहाँ से चोरी की गई लकड़ी सीधे अवैध आरा मशीनों पर भेजी जाती है, जहाँ रातों-रात कीमती लकड़ियों को काटकर उनके स्वरूप को बदल दिया जाता है।

राजस्थान हाई कोर्ट की कड़ी चेतावनी

बढ़ती अवैध कटाई और खाजूवाला अवैध लकड़ी तस्करी के मुद्दे पर राजस्थान उच्च न्यायालय ने भी सख्त रुख अपनाया है। एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान अदालत ने बीकानेर क्षेत्र में विशेषकर सौर ऊर्जा संयंत्रों (Solar Plants) की स्थापना की आड़ में हो रही पेड़ों की अंधाधुंध कटाई पर गहरी चिंता व्यक्त की है ।   

हाई कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वन विभाग के उप वन संरक्षक (DCF – II स्टेज IGNP, बीकानेर) की यह व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी कि उनके क्षेत्र में एक भी पेड़ अवैध रूप से न काटा जाए । अदालत ने चेतावनी दी है कि यदि अगली सुनवाई तक संतोषजनक रिपोर्ट नहीं दी गई, तो वन, राजस्व और ऊर्जा विभागों के सचिवों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होना पड़ेगा । न्यायिक सख्ती के बावजूद जमीनी स्तर पर माफिया और स्थानीय मिलीभगत के कारण तस्करी पर पूर्ण अंकुश नहीं लग पा रहा है।   

पर्यावरण पर प्रहार: संकट में राज्य वृक्ष खेजड़ी

इस तस्करी का सबसे बुरा प्रभाव थार मरुस्थल की जैव विविधता पर पड़ रहा है। माफिया मुख्य रूप से खेजड़ी (Prosopis cineraria) के पेड़ों को निशाना बना रहे हैं, जो राजस्थान का राज्य वृक्ष है । खेजड़ी के पेड़ मरुस्थलीकरण को रोकने और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं ।   

बीकानेर जिला पर्यावरण योजना (2024-26) के अनुसार, औद्योगिक दबाव और लकड़ी की बढ़ती मांग ने प्राकृतिक संसाधनों पर अत्यधिक दबाव डाला है । यदि खाजूवाला अवैध लकड़ी तस्करी पर लगाम नहीं लगाई गई, तो क्षेत्र में धूल भरे तूफानों और मिट्टी के कटाव की समस्या विकराल रूप ले लेगी। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि “ग्रीन बीकानेर” का सपना माफिया की कुल्हाड़ी के नीचे दम तोड़ रहा है।   

प्रशासनिक विफलता और भविष्य की रणनीति

बीकानेर जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में हुई हालिया बैठक में सभी अवैध आरा मशीनों को सीज करने के निर्देश दिए गए हैं । लेकिन समस्या यह है कि जैसे ही विभाग की टीम एक क्षेत्र में कार्रवाई करती है, माफिया दूसरे क्षेत्र में सक्रिय हो जाता है।   

समाधान की दिशा में कदम:

  1. आधुनिक निगरानी: 30 KYD और 365 हैड जैसे ‘हॉटस्पॉट’ पर सीसीटीवी और ड्रोन से निगरानी जरूरी है ।
  2. सजा का अनोखा मॉडल: डीडवाना वन विभाग की तर्ज पर, अपराधियों से आर्थिक दंड के साथ ‘पांच पौधे लगवाने’ और उनका शपथ पत्र लेने की सजा खाजूवाला में भी लागू की जानी चाहिए ।
  3. संयुक्त टास्क फोर्स: पुलिस, राजस्व और वन विभाग के साझा गश्ती दलों का गठन कर तस्करी के मूल अड्डों (अवैध आरा मशीनों) को ध्वस्त करना अनिवार्य है ।

खाजूवाला अवैध लकड़ी तस्करी केवल एक स्थानीय समस्या नहीं बल्कि एक संगठित अपराध है। प्रशासन को अब ‘कागजी कार्रवाई’ से निकलकर धरातल पर कड़ा प्रहार करना होगा ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस रेगिस्तानी प्रहरी को बचाया जा सके।

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