राजनीति

जैसलमेर: ऐतिहासिक छतरियों के पुनर्निर्माण पर विवाद, BJP विधायक ने CM से मांगी पुलिस सुरक्षा

जैसलमेर | राजस्थान के जैसलमेर जिले के पोकरण क्षेत्र में ऐतिहासिक छतरियों के पुनर्निर्माण को लेकर तनाव बढ़ गया है। बीजेपी विधायक महंत प्रतापपुरी ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर क्षेत्र में असामाजिक तत्वों की गतिविधियों पर चिंता जताई है। उन्होंने आशंका व्यक्त की है कि यदि स्थिति को नियंत्रित नहीं किया गया, तो जैसलमेर में अशांति का माहौल बन सकता है।

क्या है मामला?

पोकरण के बासनपीर गांव में 1828 के बीकानेर-जैसलमेर युद्ध में शहीद हुए वीर झुंझार रामचंद्र सिंह सोढ़ा और हदूद पालीवाल की स्मृति में बनी छतरियों का पुनर्निर्माण चल रहा है। ये छतरियां ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। लेकिन हाल ही में, 10 जुलाई 2025 को पुनर्निर्माण कार्य के दौरान सैकड़ों लोगों ने पत्थरबाजी की, जिसमें चार लोग घायल हुए, जिनमें एक पुलिसकर्मी नरपत सिंह भी शामिल हैं। कई वाहनों को भी नुकसान पहुंचा।

2019 से चला आ रहा विवाद

यह विवाद नया नहीं है। साल 2019 में असामाजिक तत्वों ने इन छतरियों को क्षतिग्रस्त कर दिया था, जिसके बाद झुंझार धरोहर बचाओ संघर्ष समिति ने विरोध प्रदर्शन किया था। उस समय तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। 2021 में पुनर्निर्माण का कार्य शुरू हुआ, लेकिन प्रशासन के आग्रह पर इसे रोक दिया गया। समिति का आरोप है कि तत्कालीन सरकार के दबाव में काम रुका।

विधायक की चेतावनी और मांग

महंत प्रतापपुरी ने अपने पत्र में लिखा कि असामाजिक तत्व क्षेत्र में अशांति फैला रहे हैं और जनता के लिए समस्याएं खड़ी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि यही स्थिति रही, तो जैसलमेर में हालात बिगड़ सकते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि छतरियों के पुनर्निर्माण के लिए पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई जाए ताकि कार्य बिना किसी बाधा के पूरा हो सके।

ऐतिहासिक महत्व और स्थानीय स्थिति

बासनपीर गांव पालीवाल ब्राह्मणों के पलायन के लिए भी जाना जाता है। यहां अवैध कब्जों की समस्या भी बढ़ रही है। छतरियां न केवल शहीदों की स्मृति का प्रतीक हैं, बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहर का हिस्सा भी हैं। विधायक ने इस बात पर जोर दिया कि इनका संरक्षण जरूरी है।

पुलिस का हस्तक्षेप

पत्थरबाजी की घटना के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाकर स्थिति को शांत किया। लेकिन स्थानीय लोग और समिति के सदस्य इस बात से नाराज हैं कि बार-बार हो रहे विवाद के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला जा रहा।

आगे क्या?

इस घटना ने एक बार फिर ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और सामुदायिक सौहार्द के मुद्दे को उजागर किया है। विधायक द्वारा मुख्यमंत्री को लिखा गया पत्र इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है। अब सबकी नजरें प्रशासन और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं, ताकि धरोहर का संरक्षण हो और क्षेत्र में शांति बनी रहे।

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