राजस्थान

जयपुर हेरिटेज मेयर मुनेश गुर्जर को हाईकोर्ट से झटका, तीसरा निलंबन बरकरा

जयपुर | जयपुर नगर निगम हेरिटेज की निलंबित मेयर मुनेश गुर्जर को राजस्थान हाईकोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। जस्टिस अनुप डंड की एकल पीठ ने उनकी याचिका को खारिज करते हुए राज्य सरकार के तीसरे निलंबन आदेश को वैध ठहराया है। मुनेश गुर्जर पर रिश्वत लेकर अवैध रूप से पट्टे जारी करने के गंभीर आरोप हैं, जिसके आधार पर राज्य सरकार ने उनके खिलाफ यह कार्रवाई की थी। यह उनके 13 महीने के कार्यकाल में तीसरा निलंबन है, और इस बार हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले को सही माना है।

तीसरे निलंबन की पृष्ठभूमि

मुनेश गुर्जर को पिछले साल 23 सितंबर को पहली बार निलंबित किया गया था। यह कार्रवाई उनके पति सुशील गुर्जर की गिरफ्तारी के बाद हुई, जिन्हें राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा था। एसीबी की छापेमारी में सुशील गुर्जर के साथ दो दलाल भी हिरासत में लिए गए थे। उनके घर की तलाशी में 40 लाख रुपये से अधिक नकदी और आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद हुए थे। इस मामले में मुनेश गुर्जर पर भी भ्रष्टाचार में संलिप्तता के आरोप लगे, जिसके बाद उन्हें मेयर पद से निलंबित कर दिया गया।

पहले और दूसरे निलंबन के मामलों में मुनेश गुर्जर को कोर्ट से राहत मिली थी, और वे अपने पद पर बहाल हो चुकी थीं। हालांकि, तीसरे निलंबन में नगर निगम के कर्मचारियों के बयानों और प्राथमिक जांच में सामने आई गंभीर अनियमितताओं ने उनके खिलाफ सबूतों को और मजबूत किया। इन आरोपों में दावा किया गया कि मुनेश गुर्जर ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए रिश्वत के बदले पट्टे जारी किए।

हाईकोर्ट का फैसला और तर्क

मुनेश गुर्जर ने तीसरे निलंबन आदेश को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उनकी याचिका में दावा किया गया था कि निलंबन की कार्रवाई गैर-कानूनी और प्रेरित है। हालांकि, जस्टिस अनुप डंड ने याचिका की सुनवाई के बाद इसे खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि प्राथमिक जांच में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के पर्याप्त सबूत मिले हैं, जो सरकार के निलंबन आदेश को उचित ठहराते हैं। कोर्ट ने यह भी माना कि मुनेश गुर्जर के खिलाफ दर्ज बयानों और जांच के निष्कर्षों ने उनके पक्ष को कमजोर किया है।

आरोपों का विवरण

मुनेश गुर्जर पर लगे आरोपों में मुख्य रूप से रिश्वत लेकर अवैध रूप से जमीन के पट्टे जारी करने की बात शामिल है। नगर निगम के कुछ कर्मचारियों ने जांच एजेंसियों के सामने बयान दर्ज कराए, जिसमें उन्होंने मेयर के कार्यकाल में अनियमितताओं की पुष्टि की। इसके अलावा, उनके पति सुशील गुर्जर की गिरफ्तारी ने मामले को और गंभीर बना दिया। एसीबी की कार्रवाई में बरामद नकदी और दस्तावेजों ने मुनेश गुर्जर की भूमिका पर सवाल उठाए।

राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभाव

मुनेश गुर्जर का निलंबन जयपुर नगर निगम हेरिटेज के लिए एक बड़ा घटनाक्रम है। उनके कार्यकाल में बार-बार निलंबन और भ्रष्टाचार के आरोपों ने शहर की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। इस घटना के बाद मेयर पद पर नई नियुक्ति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। स्थानीय नेताओं और नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि इस स्थिति का असर जयपुर हेरिटेज सिटी की विकास योजनाओं और प्रशासनिक कार्यों पर पड़ सकता है।

आगे की राह

मुनेश गुर्जर के पास अब सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का विकल्प बचा है। हालांकि, हाईकोर्ट के इस फैसले ने उनकी कानूनी लड़ाई को और जटिल कर दिया है। दूसरी ओर, राज्य सरकार और जांच एजेंसियां इस मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर सक्रिय हैं। भ्रष्टाचार के इन आरोपों की गहन जांच अभी जारी है, और आने वाले दिनों में इस मामले में नए खुलासे हो सकते हैं।

जयपुर की जनता और राजनीतिक हलकों में इस मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। मुनेश गुर्जर के निलंबन ने एक बार फिर भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई के महत्व को रेखांकित किया है।

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