बीकानेर/महाजन
वैश्विक आतंकवाद से निपटने और दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में चल रहे भारत-यूके संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘अजेय वॉरियर-25’ (Ajeya Warrior-25) का रविवार को सफल समापन हो गया। पिछले 14 दिनों से चल रहे इस युद्धाभ्यास में दोनों देशों की सेनाओं ने रेगिस्तानी इलाकों में पसीना बहाया और आधुनिक युद्ध तकनीकों को साझा किया ।
240 जांबाजों ने दिखाया दम
इस 8वें संस्करण के युद्धाभ्यास में दोनों देशों के कुल 240 सैनिकों ने हिस्सा लिया। भारतीय सेना का प्रतिनिधित्व सिख रेजिमेंट (Sikh Regiment) की टुकड़ी ने किया, जबकि ब्रिटिश सेना की ओर से रॉयल गोरखा राइफल्स (2nd Battalion Royal Gurkha Rifles) के जवान शामिल हुए। दिलचस्प बात यह है कि गोरखा राइफल्स का भारतीय सैन्य इतिहास से भी गहरा पुराना नाता रहा है, जिससे दोनों टुकड़ियों के बीच गजब का तालमेल देखने को मिला ।
आतंकवाद के खिलाफ अचूक रणनीति
महाजन रेंज के रेतीले धोरों में हुआ यह अभ्यास मुख्य रूप से ‘अर्ध-शहरी’ (semi-urban) इलाकों में काउंटर-टेररिज्म ऑपरेशन पर केंद्रित था। संयुक्त राष्ट्र (UN) के चैप्टर VII के तहत आयोजित इस ड्रिल में सैनिकों ने सिखा कि कैसे किसी रिहाइशी इलाके में छिपे आतंकियों को बिना आम नागरिकों को नुकसान पहुंचाए ढेर किया जाए।
प्रमुख गतिविधियां रहीं आकर्षण का केंद्र:
- रूम इंटरवेंशन (Room Intervention): घरों में घुसकर आतंकियों को न्यूट्रलाइज करने की तकनीक।
- ड्रोन वारफेयर: निगरानी और हमले के लिए छोटे ड्रोंस का इस्तेमाल।
- C-IED ड्रिल: रास्तों में बिछाए गए बमों (IED) को खोजने और डिफ्यूज करने का अभ्यास।
- हेलिबॉर्न ऑपरेशन्स: हेलिकॉप्टर के जरिए सैनिकों को युद्ध क्षेत्र में उतारने की मॉक ड्रिल ।
तकनीक और अनुभव का साझा मंच
सैन्य अधिकारियों के अनुसार, ‘अजेय वॉरियर’ केवल एक अभ्यास नहीं, बल्कि अनुभवों के आदान-प्रदान का मंच है। जहाँ ब्रिटिश सैनिकों ने भारतीय सेना से रेगिस्तानी युद्ध कौशल (Desert Warfare) की बारीकियां सीखीं, वहीं भारतीय जवानों ने ब्रिटिश सेना की आधुनिक सर्विलांस तकनीकों को समझा।
बीकानेर के लिए गर्व का पल
महाजन फील्ड फायरिंग रेंज, जो एशिया की सबसे बड़ी फायरिंग रेंजों में से एक है, ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि यह विश्व स्तरीय सैन्य अभ्यासों के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है। 17 नवंबर से शुरू हुए इस अभ्यास ने न केवल सामरिक दृष्टि से भारत-यूके के रिश्तों को मजबूत किया है, बल्कि वैश्विक स्तर पर बीकानेर का नाम भी रोशन किया है
