बीकानेर जिले का श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र एशिया के सबसे बड़े मूंगफली उत्पादन इलाकों में माना जाता है, लेकिन इस सीज़न में यहां के किसानों के लिए सरकारी खरीद व्यवस्था ही नई टेंशन बन गई है। किसानों की सहूलियत के नाम पर शुरू किए गए खरीद केंद्रों में बार‑बार नियम बदलने और ऑनलाइन पोर्टल की तकनीकी दिक्कतों के कारण पहले से तौली जा चुकी मूंगफली का भुगतान अटक गया है, जिससे किसान गहरी चिंता में हैं।
श्रीडूंगरगढ़ के किसानों के अनुसार शुरुआत में मूंगफली खरीद के लिए बिजली बिल को अनिवार्य कर दिया गया, ताकि फर्जी गिरदावरी और फर्जी तुलवाई पर रोक लगाई जा सके। बाद में किसानों के विरोध के बाद शर्तों में ढील दी गई और यह प्रावधान किया गया कि परिवार के किसी सदस्य के नाम से जारी बिजली बिल पर भी खरीद मान्य होगी, लेकिन इस बीच कई किसानों की निर्धारित खरीद तिथि निकल गई और वे अपनी फसल का समय पर रजिस्ट्रेशन ही नहीं करा पाए।
किसानों का आरोप है कि कागज़ों में आदेश तो बदल दिए गए, लेकिन सिस्टम और पोर्टल पर समय रहते जरूरी बदलाव नहीं किए गए। कई किसानों की मूंगफली सरकारी खरीद केंद्रों पर तय प्रक्रिया के तहत तौली गई, टोकन भी जारी हुए, मगर पोर्टल पर तारीख आगे नहीं बढ़ने से कागज़ात अपलोड नहीं हो पा रहे हैं। इसके कारण खरीद एंट्री अधूरी रह गई है और जिन किसानों ने फसल पहले ही सौंप दी, उनका भुगतान आज तक रुका हुआ है।
प्रचलित व्यवस्था के अनुसार फसल तौलने के बाद किसानों को एक टोकन दिया जाता है, जिस पर खरीदी की तारीख और लगभग 10 दिन की वैधता दर्ज होती है। किसानों का कहना है कि पोर्टल में गड़बड़ी और तारीख आगे न बढ़ने की वजह से इस अवधि के भीतर ऑनलाइन एंट्री नहीं हो सकी, जिसके कारण कई टोकन practically बेकार हो गए हैं। तौल पूरी हो जाने के बाद भी रुपये खाते में नहीं आने से किसान अपनी अगली फसल और घरेलू जरूरतों की योजना नहीं बना पा रहे।
श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र के मूंगफली उत्पादक किसानों ने सरकार और जिला प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। किसानों का कहना है कि जब उनकी फसल सरकारी खरीद केंद्रों पर तौली जा चुकी है और उनके पास टोकन भी मौजूद हैं, तो केवल तकनीकी खामियों और तारीख से जुड़ी दिक्कतों के नाम पर भुगतान रोकना न्यायसंगत नहीं है। किसानों ने मूंगफली खरीद पोर्टल दोबारा खोलकर तारीख आगे बढ़ाने और लंबित भुगतान जल्द जारी करने की अपील की है, ताकि वे समय पर अगली फसल की तैयारी कर सकें और आर्थिक संकट से उबर सकें।
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