राजस्थान

राजस्थान में पंचायत चुनाव को लेकर हाईकोर्ट और सरकार आमने-सामने

राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर एक नया सियासी-कानूनी घमासान छिड़ गया है। राज्य सरकार ने गुरुवार को हाईकोर्ट की एकलपीठ के उस आदेश के खिलाफ अपील दायर की, जिसमें शीघ्र चुनाव कराने का निर्देश दिया गया था। इस अपील पर हाईकोर्ट की खंडपीठ, जिसमें न्यायाधीश अवनीश झिंगन और न्यायाधीश बलजिंदर संधू शामिल हैं, आज शुक्रवार को सुबह 10:25 IST के बाद सुनवाई करेगी। दूसरी ओर, राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव की तैयारियों को रफ्तार दी है और कलक्टरों के लिए दिशा-निर्देशों का मसौदा तैयार करने में जुट गया है।

हाईकोर्ट एकलपीठ का अहम फैसला

हाईकोर्ट की एकलपीठ ने हाल के दिनों में आए अपने फैसले में स्पष्ट किया कि संविधान के तहत स्थानीय निकायों के चुनाव हर पांच साल में अनिवार्य हैं, जिसमें अधिकतम छह माह की अतिरिक्त छूट संभव है। इस आदेश में संवैधानिक प्रावधानों और पिछले न्यायिक निर्देशों का हवाला देते हुए तत्काल चुनाव की मांग की गई। फैसले की प्रति निर्वाचन आयोग और मुख्य सचिव को भेजी जा चुकी है, जिससे चुनाव प्रक्रिया शुरू करने का दबाव बढ़ गया है।

सरकार का बचाव और समय की मांग

राज्य सरकार ने एकलपीठ के आदेश को चुनौती देते हुए अपील दायर की है। सरकार का तर्क है कि परिसीमन प्रक्रिया और हाल ही में गठित नए जिलों के कारण चुनाव के लिए अतिरिक्त समय जरूरी है। उनका कहना है कि जल्दबाजी में चुनाव कराना प्रशासनिक अराजकता को जन्म दे सकता है। इस बीच, पंचायत और निकाय चुनावों से जुड़ी कई जनहित याचिकाओं पर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पहले ही सुनवाई पूरी कर ली है, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।

निर्वाचन आयोग की तेजी

दूसरी ओर, राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनावी तैयारियों को गति दी है। गुरुवार को आयोजित बैठक में आयोग ने कलक्टरों के लिए दिशा-निर्देशों के मसौदे पर काम पूरा किया। आयोग का लक्ष्य है कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में जल्द से जल्द चुनाव की तारीखें घोषित की जा सकें। हालांकि, सरकार और आयोग के बीच समन्वय को लेकर अभी भी अस्पष्टता बनी हुई है।

आज की सुनवाई पर सबकी नजर

शुक्रवार की खंडपीठ सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं। अगर खंडपीठ सरकार की अपील को खारिज करती है, तो चुनाव प्रक्रिया शुरू हो सकती है। वहीं, अगर राहत मिलती है, तो समयसीमा बढ़ने की संभावना है। इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों और आम जनता के बीच बहस तेज हो गई है, क्योंकि स्थानीय निकाय चुनाव राज्य के ग्रामीण और शहरी प्रशासन पर गहरा असर डालेंगे।

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