हरियाणा के मशहूर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, समाजसेवी और गोहाना से चुनाव लड़ चुके हर्ष छिकारा पिछले कुछ दिनों से लापता हैं। उनका मोबाइल बंद है और वे सोशल मीडिया से भी गायब हैं। उनके समर्थक पूछ रहे हैं कि क्या यह “सच बोलने की सजा” है? वहीं, प्रशासन का कहना है कि यह “कानून का शिकंजा” है।
हमने इस पूरे मामले की तहकीकात की है। हर्ष छिकारा के ‘अंडरग्राउंड’ होने के पीछे सिर्फ एक नहीं, बल्कि तीन बड़ी वजहें सामने आ रही हैं।
वजह नंबर 1: ‘महल’ पर चला प्रशासन का डंडा
सबसे ताज़ा मामला उनके ड्रीम प्रोजेक्ट यानी सोनीपत के महलाना रोड पर स्थित निर्माणाधीन आवास का है।
- क्या हुआ? 4 जनवरी 2026 के आसपास, नगर निगम की टीम ने भारी पुलिस बल के साथ पहुंचकर इस आलीशान घर को सील कर दिया।
- प्रशासन का तर्क: अधिकारियों के मुताबिक, यह निर्माण अवैध था। कृषि भूमि पर बिना CLU (Change of Land Use) और बिना नक्शा पास कराए करोड़ों का निर्माण किया जा रहा था।
- मायने: यह कार्रवाई छिकारा की आर्थिक कमर तोड़ने और उनके ‘रसूख’ को चुनौती देने जैसी है। जब घर सील हुआ, तो छिकारा मौके पर नहीं मिले, जिससे उनके फरार होने की चर्चा शुरू हुई।
वजह नंबर 2: असली मुसीबत? (आयुष विभाग का छापा और FIR)
हर्ष छिकारा के गायब होने की सबसे बड़ी वजह शायद उनका घर नहीं, बल्कि उनका ‘दवाइयों का कारोबार’ है। यह खबर कई लोगों की नजर से बच गई थी।
- बड़ा खुलासा: हाल ही में आयुष विभाग (Ayush Department) ने सोनीपत में छापेमारी की थी। आरोप है कि छिकारा और उनके सहयोगी भ्रामक विज्ञापनों के जरिए संदिग्ध दवाइयां बेच रहे थे।
- FIR दर्ज: इस मामले में ‘मिलावट’ और ‘भ्रामक प्रचार’ के आरोप में पुलिस ने FIR दर्ज की है। प्रशासन का कहना है कि सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स का फायदा उठाकर जनता की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा था।
- गिरफ्तारी का डर: कानून के जानकारों का मानना है कि घर की सीलिंग एक सिविल मामला हो सकता है, लेकिन ‘मिलावटी दवा’ और ‘धोखाधड़ी’ का केस गैर-जमानती हो सकता है। यही वह असली डर है जिसके कारण छिकारा को भूमिगत होना पड़ा है।
वजह नंबर 3: पुराने गड़े मुर्दे (भड़काऊ भाषण)
तीसरी वजह उनका ‘बड़बोलापन’ हो सकता है।
- मनीषा हत्याकांड मामला: भिवानी के मनीषा हत्याकांड के दौरान छिकारा ने काफी आक्रामक बयानबाजी की थी। उन पर भीड़ को उकसाने और भड़काऊ भाषण देने के आरोप लगे थे।
- हैदराबाद केस: पुलिस रिकॉर्ड में उनके पुराने वीडियो भी हैं जिनमें वे आरोपियों को “जान से मारने” की वकालत करते नजर आए थे।
- एक्शन: प्रशासन अब इन पुराने मामलों की फाइलें भी दोबारा खोल रहा है ताकि उन पर शिकंजा कसा जा सके।
समर्थकों का दावा: “साजिश का शिकार”
हर्ष छिकारा की टीम और उनके समर्थकों का कहना है कि सरकार उनकी लोकप्रियता से डर गई है।
- तर्क: “हर्ष भाई हमेशा गरीबों की मदद करते हैं और सरकार की नाकामियों पर सवाल उठाते हैं, इसलिए उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। अवैध निर्माण तो हज़ारों हैं, सिर्फ हर्ष छिकारा का घर ही क्यों सील हुआ?”
- सच बोलने की सजा? सोशल मीडिया पर #IStandWithHarshChhikara ट्रेंड कराया जा रहा है, जिसमें इसे राजनीतिक बदले की भावना बताया जा रहा है।
निष्कर्ष: अब आगे क्या?
फिलहाल हर्ष छिकारा पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। वे संभवतः अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) की जुगत में लगे हैं।
- अगर उन्हें जमानत मिल जाती है, तो वे बाहर आकर इसे अपनी “जीत” बताएंगे।
- अगर पुलिस उन्हें पहले गिरफ्तार कर लेती है, तो उनकी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
बड़ा सवाल: क्या हर्ष छिकारा एक ‘समाजसेवी’ हैं जिसे सिस्टम कुचल रहा है, या वे एक ‘चतुर खिलाड़ी’ हैं जो कानून को अपनी जेब में समझते थे?