हनुमानगढ़ | राजस्थान का ‘धान का कटोरा’ कहे जाने वाले हनुमानगढ़ में आज (शुक्रवार) एक बार फिर किसान आंदोलन का बिगुल बज चुका है। सिंचाई पानी की किल्लत और नहरों की खस्ताहाल स्थिति से आक्रोशित हजारों किसान आज ‘भगवान हेड’ (Bhagwan Head) पर महापंचायत कर रहे हैं। इस महापंचायत में नोहर फीडर क्षेत्र के करीब 35 गांवों के किसानों का हुजूम उमड़ रहा है।
क्यों उबल रहा है किसानों का गुस्सा?
नोहर फीडर संघर्ष समिति और स्थानीय किसान नेताओं के मुताबिक, यह लड़ाई अब ‘आर-पार’ की हो चुकी है। मुख्य मुद्दा नोहर फीडर नहर का नवनिर्माण और पूरा सिंचाई पानी मिलना है।
- जर्जर नहर, सूखा खेत: किसानों का आरोप है कि नोहर फीडर नहर लंबे समय से जर्जर अवस्था में है। जगह-जगह से टूटी नहर के कारण पानी टेल (अंतिम छोर) तक नहीं पहुँच पा रहा है।
- सिर्फ आश्वासन, काम नहीं: किसान नेता सोहन ढिल ने कल (गुरुवार) भगवान हेड पर हुई प्रेसवार्ता में साफ कर दिया कि प्रशासन ने अब तक सिर्फ कोरे आश्वासन दिए हैं। नहर के नवनिर्माण को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
35 गांवों का ‘अल्टीमेटम’
आज की महापंचायत साधारण नहीं है। इसमें 35 गांवों के किसान अपने ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ पहुँच रहे हैं। किसानों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो यह आंदोलन उग्र रूप ले सकता है।
- रणनीति का ऐलान: आज की महापंचायत में ही तय होगा कि आगे क्या करना है। किसान नेताओं ने संकेत दिए हैं कि अगर प्रशासन ने लिखित में ठोस कार्रवाई का भरोसा नहीं दिया, तो वे भगवान हेड पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर सकते हैं या चक्काजाम जैसा बड़ा कदम उठा सकते हैं।
- प्रशासन की सांसें फूली: किसानों की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस बल मुस्तैद है। ‘लॉ एंड ऑर्डर’ बनाए रखने के लिए भगवान हेड और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
नेताओं की हुंकार: “यह अस्तित्व की लड़ाई है”
महापंचायत में शामिल होने जा रहे बुजुर्ग किसानों का कहना है कि रबी की फसल (सरसों, गेहूं) को इस समय पानी की सख्त जरूरत है। अगर अभी नहर का निर्माण और पानी की सप्लाई सुचारू नहीं हुई, तो पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी। यह उनके लिए केवल पानी की मांग नहीं, बल्कि रोजी-रोटी और अस्तित्व का सवाल है।
