पंजाब इन दिनों भीषण बाढ़ की चपेट में है। लगातार हो रही भारी बारिश ने नदियों और नालों को उफान पर ला दिया है। कई जिलों में गांव पूरी तरह से पानी से घिर चुके हैं और हज़ारों लोग सुरक्षित ठिकानों की तलाश में अपने घर छोड़ने को मजबूर हैं।
पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, कपूरथला, फरीदकोट, पटियाला और संगरूर जैसे जिलों में सबसे ज़्यादा नुकसान दर्ज किया गया है। खेतों में लगी धान और मक्के की फसलें पूरी तरह डूब चुकी हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीण इलाकों में सड़कें और पुल टूटने से कई गांवों का संपर्क टूट गया है। स्कूलों को बंद करना पड़ा है और रेलवे सेवाओं पर भी असर पड़ा है। हजारों लोग राहत शिविरों में ठहराए गए हैं, लेकिन भीड़ बढ़ने के कारण व्यवस्थाओं पर दबाव साफ दिख रहा है।
सेना, NDRF और स्थानीय प्रशासन लगातार राहत कार्य चला रहे हैं। नावों और मोटर बोट्स की मदद से फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकाला जा रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र सरकार से विशेष राहत पैकेज की मांग की है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया है।
मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और बारिश की संभावना जताई है। कई जिलों में येलो और रेड अलर्ट जारी किया गया है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदियों और जलभराव वाले इलाकों के पास जाने से बचें।
पंजाब में आई बाढ़ केवल प्राकृतिक आपदा नहीं बल्कि मानवीय संकट बन चुकी है। किसानों से लेकर आम नागरिक तक सभी प्रभावित हैं। राहत कार्य जारी हैं, लेकिन जब तक बारिश थमती नहीं और पानी का स्तर घटता नहीं, तब तक हालात सामान्य होने की संभावना कम है।
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