राजनीति

राजस्थान में फर्जी दिव्यांग कर्मचारियों की जांच पर विवाद: कांग्रेस ने भजनलाल सरकार पर साधा निशाना

जयपुर: राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार द्वारा फर्जी दिव्यांग कर्मचारियों के दस्तावेजों की जांच के आदेश ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस फैसले पर तीखा हमला बोलते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। डोटासरा ने पूछा कि यह जांच केवल दिव्यांग कर्मचारियों तक ही क्यों सीमित है, जबकि सभी सरकारी कर्मचारियों के दस्तावेजों की जांच होनी चाहिए। इस मुद्दे पर सत्तारूढ़ बीजेपी और विपक्षी कांग्रेस के बीच तनातनी बढ़ गई है।

कार्मिक विभाग का आदेश

कार्मिक विभाग (DOP) के सचिव केके पाठक ने हाल ही में एक सर्कुलर जारी किया, जिसमें पिछले पांच साल में सरकारी सेवा में शामिल हुए दिव्यांग कर्मचारियों के मेडिकल दस्तावेजों की दोबारा जांच के निर्देश दिए गए हैं। सर्कुलर के अनुसार, इन कर्मचारियों का मेडिकल सरकारी मेडिकल कॉलेज या सरकारी अस्पताल के मेडिकल बोर्ड द्वारा किया जाएगा। इस आदेश को सरकार ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए नौकरी हासिल करने वालों पर नकेल कसने के लिए उठाया गया कदम बताया है।

डोटासरा का तंज: ‘सिर्फ दिव्यांगों पर ही क्यों निशाना?’

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस आदेश को दिव्यांग कर्मचारियों का अपमान करार देते हुए सरकार पर तंज कसा। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से सवाल किया, “जांच का यह आदेश केवल दिव्यांग कर्मचारियों के लिए ही क्यों है? अगर सरकार फर्जीवाड़े को उजागर करना चाहती है, तो सभी सरकारी कर्मचारियों के दस्तावेजों की जांच क्यों नहीं कराई जा रही?” डोटासरा ने कहा कि ऐसी जांच से “दूध का दूध और पानी का पानी” हो जाएगा, लेकिन सरकार का यह कदम चुनिंदा तरीके से उठाया गया है, जो संदेह पैदा करता है।

‘दिव्यांगों का अपमान, पुरानी बीजेपी सरकारों को बचाने की कोशिश’

डोटासरा ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार इस आदेश के जरिए केवल दिव्यांग कर्मचारियों को निशाना बना रही है, जबकि पूर्व बीजेपी सरकारों के दौरान नियुक्त हुए फर्जी कर्मचारियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा, “वर्षों से राजकीय सेवा में समर्पित भाव से काम कर रहे दिव्यांग कर्मचारियों पर शक करना उनका अपमान है। यह सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है।” डोटासरा ने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार अपने पिछले शासनकाल में हुई गड़बड़ियों को छिपाने के लिए यह कदम उठा रही है।

सियासी घमासान के आसार

इस आदेश और कांग्रेस के तीखे पलटवार ने राजस्थान की सियासत में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार का यह कदम न केवल भेदभावपूर्ण है, बल्कि यह दिव्यांग समुदाय के प्रति असंवेदनशीलता को भी दर्शाता है। दूसरी ओर, बीजेपी का दावा है कि यह जांच फर्जी दस्तावेजों के जरिए नौकरी हासिल करने वालों को पकड़ने के लिए जरूरी है।

यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि कांग्रेस ने इस मामले को विधानसभा सत्र में जोर-शोर से उठाने का संकेत दिया है। यह देखना होगा कि क्या सरकार इस जांच को सभी कर्मचारियों तक विस्तार देगी या यह विवाद और गहराएगा।

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