बीकानेर | पश्चिमी राजस्थान के बीकानेर में सियासी पारा सातवें आसमान पर है। ‘मरुधरा’ की पहचान खेजड़ी और गोचर भूमि को बचाने के साथ-साथ पीबीएम अस्पताल की बदहाली के खिलाफ यूथ कांग्रेस ने एक बड़ा आंदोलन छेड़ दिया है। बीकानेर कलेक्ट्रेट पर हुए विशाल विरोध-प्रदर्शन में हजारों की संख्या में कार्यकर्ता उमड़े, जिसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
बीकानेर कलेक्ट्रेट परिसर गुरुवार को एक अखाड़े में तब्दील हो गया। यूथ कांग्रेस देहात अध्यक्ष भंवर कूकणा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता अपनी मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट का घेराव करने पहुंचे थे। प्रदर्शनकारियों का जोश तब और बढ़ गया जब राजस्थान यूथ कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष और विधायक अभिमन्यु पूनिया भी इसमें शामिल हुए ।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कार्यकर्ता जब कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार की ओर बढ़े, तो पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेड्स लगा रखे थे। जब कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड्स पार करने की कोशिश की, तो पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग (लाठीचार्ज) करना पड़ा, जिससे माहौल गरमा गया ।
यह प्रदर्शन केवल शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि बीकानेर की जनता से जुड़े चार बुनियादी मुद्दों पर केंद्रित था:
प्रदर्शन का सबसे भावनात्मक मुद्दा ‘खेजड़ी’ के पेड़ों की कटाई है। यूथ कांग्रेस का आरोप है कि जिले में सौर ऊर्जा संयंत्रों (Solar Plants) के लिए धड़ल्ले से राज्य वृक्ष खेजड़ी को काटा जा रहा है। भंवर कूकणा ने चेतावनी दी है कि पर्यावरण की कीमत पर विकास स्वीकार नहीं किया जाएगा ।
पश्चिमी राजस्थान में पशुपालन रीढ़ की हड्डी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि गोचर भूमि (चरागाह) पर भू-माफियाओं और रसूखदारों का कब्जा बढ़ता जा रहा है, जिससे पशुपालकों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। मांग है कि प्रशासन अवैध कब्जों पर बुलडोजर चलाए ।
संभाग के सबसे बड़े पीबीएम (PBM) अस्पताल में अव्यवस्थाओं को लेकर भी भारी आक्रोश है। यूथ कांग्रेस का आरोप है कि ट्रामा सेंटर में संसाधनों की कमी और डॉक्टरों की लापरवाही से मरीजों की जान जा रही है। पूर्व में हुए हादसों और ऑक्सीजन सप्लाई की समस्याओं को लेकर प्रशासन को घेरा गया ।
ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा मजदूरों को समय पर भुगतान न मिलने और काम की कमी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि गोचर भूमि के विकास कार्यों को मनरेगा से जोड़ा जाए ताकि रोजगार और पर्यावरण संरक्षण दोनों हो सकें ।
“सरकार कॉरपोरेट के इशारे पर पर्यावरण और गरीब किसान का गला घोंट रही है। अगर हमारी मांगें नहीं मानी गईं, तो यह आंदोलन अब सड़कों से उठकर विधानसभा तक जाएगा।” — अभिमन्यु पूनिया, प्रदेशाध्यक्ष (यूथ कांग्रेस)
“प्रशासन कुंभकर्णी नींद सो रहा है। खेजड़ी हमारी मां है और गोचर हमारी आजीविका। हम इंच भर जमीन भी माफियाओं को नहीं देंगे।” — भंवर कूकणा, देहात अध्यक्ष (यूथ कांग्रेस, बीकानेर)
इस विरोध-प्रदर्शन ने स्पष्ट कर दिया है कि यूथ कांग्रेस अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है। पुलिस कार्रवाई के बाद कार्यकर्ताओं में रोष और बढ़ गया है। जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में बीकानेर संभाग में गोचर और खेजड़ी के मुद्दे पर बड़े किसान आंदोलन की सुगबुगाहट है, जो राज्य सरकार के लिए सिरदर्द साबित हो सकती है ।
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