बीकानेर संभाग मौसम अपडेट (Bikaner Sambhag Weather Update) की ताज़ा जानकारी के अनुसार, फरवरी के महीने में गर्मी की आहट के बीच मौसम ने अचानक एक यू-टर्न लिया है। पश्चिमी राजस्थान के प्रमुख जिलों में सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) ने मंगलवार रात और बुधवार सुबह को मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया है। जहाँ एक तरफ गिरते तापमान ने लोगों को फिर से रजाई में दुबकने पर मजबूर कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ अंधड़ और ओलावृष्टि ने अन्नदाता की चिंता को चरम पर पहुँचा दिया है। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम जिलेवार मौसम, फसलों पर असर और अगले 5 दिनों के पूर्वानुमान को समझेंगे।
पश्चिमी विक्षोभ का असर: ‘गर्मी में सर्दी’ का अहसास
फरवरी के शुरुआती हफ्तों में बीकानेर और श्रीगंगानगर में तापमान सामान्य से 5-6 डिग्री सेल्सियस ऊपर चल रहा था, जिससे ऐसा लग रहा था कि सर्दी विदा हो चुकी है। 15 फरवरी तक श्रीगंगानगर का तापमान 30.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया था, जो आमतौर पर मार्च के मध्य में होता है। लेकिन 17-18 फरवरी को आए विक्षोभ ने पारे को फिर से लुढ़का दिया है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, यह विक्षोभ एक प्रेरित चक्रवाती परिसंचरण (Induced Cyclonic Circulation) के रूप में पंजाब और पश्चिमी राजस्थान के ऊपर बना हुआ है, जो अरब सागर से नमी खींच रहा है।
चूरू और बीकानेर: ओलावृष्टि का ‘ऑरेंज अलर्ट’ और जमीनी हकीकत
बीकानेर संभाग मौसम अपडेट में सबसे चिंताजनक स्थिति चूरू जिले की है। मौसम विभाग ने आज चूरू के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है। जिले के राजगढ़, तारानगर और सरदारशहर तहसीलों में तेज मेघगर्जन के साथ ओलावृष्टि की खबरें हैं।
- रतनगढ़ और कांगड़: इन क्षेत्रों में चने के आकार के ओले गिरने की सूचना है। खुले आसमान के नीचे पड़ी कटी हुई फसलें और खड़ी सरसों को इससे भारी यांत्रिक क्षति (Mechanical Damage) पहुँचने की आशंका है।
- बीकानेर जिला: यहाँ ‘येलो अलर्ट’ प्रभावी है। लूणकरणसर और खाजूवाला ब्लॉक में गरज के साथ छींटे पड़े हैं। हवाओं की गति 30-40 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई है, जिससे रेतीले इलाकों में दृश्यता (Visibility) कम हो गई है।
श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़: ‘अमृत’ या ‘आफत’?
‘राजस्थान का अन्नागार’ कहे जाने वाले श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों में स्थिति मिली-जुली है। यहाँ हो रही बारिश (मावठ) को लेकर कृषि विशेषज्ञों और किसानों की राय बंटी हुई है।
1. गेहूं (Wheat) के लिए संजीवनी
श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ में लगभग 4.8 लाख हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई की गई है। गेहूं की फसल अभी ‘मिल्किंग स्टेज’ (दाना भरने की अवस्था) में है। पिछले हफ्ते की गर्मी (30°C+) के कारण ‘टर्मिनल हीट स्ट्रेस’ का खतरा मंडरा रहा था, जिससे दाना सिकुड़ सकता था और पैदावार घट सकती थी। यह बारिश तापमान को कम कर गेहूं को ‘पकने’ के लिए अतिरिक्त समय देगी, जिससे दाने का वजन बढ़ेगा और बंपर पैदावार की उम्मीद जगी है।
2. सरसों (Mustard) के लिए काल
दूसरी ओर, सरसों और चने की फसल के लिए यह मौसम बेहद खतरनाक है। हनुमानगढ़ के नोहर, भादरा और श्रीगंगानगर के अनूपगढ़ बेल्ट (जो अब वापस गंगानगर जिले का हिस्सा है) में सरसों की फसल कटाई के लिए तैयार है या कटकर खेतों में पड़ी है।
- नुकसान का डर: बारिश के साथ चल रही तेज हवाओं (Squall winds) से सरसों की फलियाँ चटककर खेत में गिर सकती हैं (Shattering)। कृषि वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यदि ओले गिरे, तो सरसों की 100% तक क्षति हो सकती है।
- चेपा (Aphid) का प्रकोप: बादल छाए रहने और नमी बढ़ने से ‘चेपा’ रोग का प्रकोप बढ़ने की आशंका है, जो बची-कुची फसल का रस चूसकर उसे बर्बाद कर सकता है।
सिंचाई संकट और किसान आंदोलन
मौसम की मार के साथ-साथ किसान सिंचाई के पानी की कमी से भी जूझ रहे हैं। बीकानेर संभाग मौसम अपडेट के साथ यह जानना भी जरूरी है कि गंगनहर परियोजना में पानी की भारी किल्लत है। फसलों को बचाने के लिए 1500 क्यूसेक पानी की आवश्यकता है, लेकिन केवल 970 क्यूसेक पानी ही मिल पा रहा है।
- विरोध प्रदर्शन: संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चा ने चेतावनी दी है कि अगर सिंचाई का पानी पूरा नहीं मिला, तो 20 फरवरी को श्रीगंगानगर और पदमपुर में चक्का जाम किया जाएगा। यह तारीख इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 20 फरवरी से मौसम साफ होने के बाद तापमान फिर बढ़ेगा और फसलों को पानी की सख्त जरूरत होगी।
प्रशासन का एक्शन: सीएम ने दिए गिरदावरी के निर्देश
बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि को देखते हुए राज्य सरकार तुरंत हरकत में आई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए बीकानेर, चूरू और सीकर के जिला कलेक्टरों से सीधा संवाद किया।
- सीएम के निर्देश: मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बारिश और ओलावृष्टि से हुए फसल खराबे का तुरंत सर्वे (Special Girdawari) करवाया जाए।
- मुआवजा प्रक्रिया: राजस्व विभाग को आदेश दिया गया है कि ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ के तहत किसानों के क्लेम जल्द से जल्द प्रोसेस किए जाएँ। पटवारियों को खेतों में जाकर भौतिक सत्यापन करने को कहा गया है।
अगले 5 दिनों का मौसम पूर्वानुमान (19-23 फरवरी 2026)
बीकानेर संभाग मौसम अपडेट के तहत, मौसम केंद्र जयपुर ने अगले 5 दिनों के लिए निम्नलिखित पूर्वानुमान जारी किया है:
| तारीख | मौसम की स्थिति | अधिकतम तापमान | चेतावनी/सलाह |
| 19 फरवरी | आसमान साफ होना शुरू होगा, सुबह कोहरा संभव। | 25°C – 27°C | ठंडक बनी रहेगी। |
| 20 फरवरी | मौसम पूरी तरह शुष्क (Dry)। | 28°C – 29°C | कीटनाशक छिड़काव के लिए उपयुक्त। |
| 21 फरवरी | धूप खिलेगी, तापमान में बढ़ोतरी। | 29°C – 30°C | गर्मी की वापसी। |
| 22 फरवरी | तेज धूप। | 30°C – 31°C | फसलों को सिंचाई की आवश्यकता। |
| 23 फरवरी | गर्म दिन। | 31°C+ | हीट स्ट्रेस की संभावना। |
मौसम विभाग का कहना है कि 19 फरवरी से पश्चिमी विक्षोभ का असर खत्म हो जाएगा और 21 फरवरी से तापमान में फिर से 2-4 डिग्री की बढ़ोतरी होगी।
किसानों के लिए एग्रो-एडवायजरी (Agro-Advisory)
- कटाई और भंडारण: जिन किसानों की सरसों या चने की फसल कट चुकी है, उसे तुरंत त्रिपाल से ढकें। गीली फसल में फफूंद (Fungus) लगने का खतरा होता है।
- कीटनाशक: बारिश रुकने और आसमान साफ होने तक किसी भी प्रकार के कीटनाशक का छिड़काव न करें, क्योंकि बारिश से दवा धुल जाएगी। 20 फरवरी के बाद ही ‘इमिडाक्लोप्रिड’ (Imidacloprid) का छिड़काव करें।
- सिंचाई: गेहूं के किसान 21 फरवरी के बाद तापमान बढ़ने पर हल्की सिंचाई करें, ताकि दाना बनते समय नमी की कमी न हो।
बीकानेर संभाग मौसम अपडेट यह स्पष्ट करता है कि अगले 24 घंटे किसानों के लिए बेहद नाजुक हैं। हालांकि यह बारिश रबी की कुछ फसलों के लिए वरदान है, लेकिन ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने इसे चिंता का विषय बना दिया है। प्रशासन की मुस्तैदी और किसानों की सतर्कता ही इस प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान को कम कर सकती है।
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