राजस्थान

बीकानेर: आयुष्मान हार्ट केयर सेंटर के खिलाफ रामनिवास कुकणा का धरना तेज, प्रशासन को आंदोलन की चेतावनी

बीकानेर में आयुष्मान हार्ट केयर सेंटर के सामने राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव रामनिवास कुकणा के नेतृत्व में चल रहा धरना अब और मुखर हो गया है। यह शांतिपूर्ण गांधीवादी आंदोलन अस्पताल प्रशासन पर लगे गंभीर आरोपों को लेकर शुरू हुआ था और अब यह स्थानीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बन चुका है। धरना स्थल पर समर्थकों की भीड़ बढ़ रही है, और मांगों को लेकर प्रशासन पर दबाव बन रहा है।

धरने की वजह: अस्पताल पर लापरवाही के आरोप

रामनिवास कुकणा ने आयुष्मान हार्ट केयर सेंटर और इसके संचालक डॉ. बीएल स्वामी पर मरीजों के साथ दुर्व्यवहार और चिकित्सा सेवाओं में लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि अस्पताल की अनियमितताओं से कई मरीज और उनके परिवार प्रभावित हुए हैं। कुकणा ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाते हुए जनता के हित में कार्रवाई की मांग की है।

ताजा अपडेट: बढ़ता समर्थन और सख्त चेतावनी

25 सितंबर 2025 तक धरना अपनी मांगों को लेकर और तेज हो गया है। रामनिवास कुकणा ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अस्पताल के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो यह धरना एक बड़े जनांदोलन में बदल सकता है। 10 सितंबर को पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को जबरन हटाने की कोशिश ने इस मामले को और गंभीर बना दिया। पूर्व मंत्री भंवर सिंह भाटी ने इस पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया।

18 सितंबर को कांग्रेस नेता महेंद्र गहलोत ने धरना स्थल का दौरा किया और कुकणा के आंदोलन को पूर्ण समर्थन देने का ऐलान किया। उन्होंने प्रशासन से शिकायतों की निष्पक्ष जांच की मांग की। सोशल मीडिया पर #JusticeForPatients और #BikanerDharna जैसे हैशटैग के जरिए यह मुद्दा व्यापक चर्चा में है, जहां लोग अस्पताल की सेवाओं पर सवाल उठा रहे हैं।

प्रशासन का रुख और भविष्य की संभावनाएं

प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में कोई ठोस बयान या कार्रवाई सामने नहीं आई है। धरना स्थल पर बढ़ती भीड़ और राजनीतिक समर्थन ने स्थिति को संवेदनशील बना दिया है। यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो कुकणा ने अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी दी है। यह आंदोलन न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठाता है, बल्कि नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को भी रेखांकित करता है।

स्थानीय लोग इस मामले में प्रशासन के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं। रामनिवास कुकणा का यह धरना बीकानेर में एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक बदलाव की शुरुआत बन सकता है।

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