राजस्थान

बीकानेर में टोल मुक्ति की मांग को लेकर उग्र प्रदर्शन की तैयारी, 11वें दिन भी ग्रामीण अडिग

बीकानेर । राजस्थान के बीकानेर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में टोल नाकों से मुक्ति की मांग को लेकर आंदोलन ने जोर पकड़ लिया है। उत्तमादेसर में पिछले 11 दिनों से सैकड़ों ग्रामीण एकजुट होकर अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर डटे हुए हैं। उनकी प्रमुख मांग है कि आसपास के 15 गांवों के वाहनों को टोल शुल्क से पूर्ण छूट दी जाए। यह आंदोलन अब एक बड़े जनांदोलन का रूप लेने की ओर अग्रसर है, और आज, 22 सितंबर को, ग्रामीणों ने एक विशाल प्रदर्शन की घोषणा की है।

इससे पहले, ठुकरियास टोल चौकी पर भी इसी तरह का प्रदर्शन देखा गया था, जहां ग्रामीणों की मांगों पर सहमति बनने के बाद आंदोलन समाप्त हुआ। हालांकि, उत्तमादेसर में स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि टोल नाकों के कारण उनकी रोजमर्रा की जिंदगी और आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ रहा है। खासकर, किसानों और छोटे व्यापारियों को बार-बार टोल शुल्क देने के कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

प्रधान प्रतिनिधि आत्माराम तर्ड ने हमारे संवाददाता को बताया, “आज आंदोलन का 11वां दिन है, लेकिन टोल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई है। हमारी मांग स्पष्ट है—आसपास के 15 गांवों के लोगों को टोल शुल्क से छूट मिलनी चाहिए। यह टोल न केवल हमारी आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर रहा है, बल्कि गांवों के बीच आवागमन को भी मुश्किल बना रहा है।” तर्ड ने आगे कहा कि आज दोपहर को होने वाला प्रदर्शन इस मुद्दे को और जोरदार तरीके से उठाने का प्रयास होगा।

आंदोलन में मगनाराम केड़ली, आत्माराम तर्ड सहित कई जनप्रतिनिधियों और ग्रामीण नेताओं का नेतृत्व देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि टोल नाकों की वजह से न केवल उनकी जेब पर बोझ पड़ रहा है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक असमानता को भी बढ़ावा दे रहा है। ग्रामीणों का तर्क है कि टोल नाके मुख्य रूप से शहरों को जोड़ने वाली सड़कों पर हैं, लेकिन आसपास के गांवों के लोग, जो इन सड़कों का नियमित उपयोग करते हैं, उन्हें भी भारी शुल्क देना पड़ रहा है।

स्थानीय निवासियों ने यह भी बताया कि इस आंदोलन में महिलाएं, युवा और बुजुर्ग सभी शामिल हैं। प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे हैं, लेकिन उनका कहना है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं, तो वे आंदोलन को और तेज करने के लिए मजबूर होंगे। कुछ ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि टोल नीति में संशोधन कर स्थानीय लोगों के लिए विशेष छूट की व्यवस्था की जाए।

टोल प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार, स्थानीय प्रशासन इस मुद्दे पर चर्चा के लिए ग्रामीण प्रतिनिधियों के साथ बैठक की योजना बना रहा है। यह देखना बाकी है कि आज के विशाल प्रदर्शन के बाद स्थिति में कोई बदलाव आता है या नहीं।

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