राजस्थान

BIG BREAKING: अस्पताल के नीचे मिला ‘बारूद का ढेर’! बीकानेर में 1400 जिंदा कारतूस मिलने से हड़कंप

महाजन (बीकानेर): क्या हो अगर आप अस्पताल इलाज कराने जाएं और पता चले कि आपके पैरों के नीचे जमीन में हजारों जिंदा कारतूस दबे हैं? 😱 राजस्थान के बीकानेर जिले के महाजन कस्बे में कुछ ऐसा ही हुआ है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है!


1. खुदाई में निकली ‘मौत की पोटली’!

महाजन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में सब कुछ सामान्य चल रहा था. अस्पताल के विस्तार के लिए पीछे की जमीन पर जेसीबी और ट्रैक्टरों से खुदाई हो रही थी. तभी मजदूरों की कुदाल एक प्लास्टिक के कट्टे (थैले) से टकराई. जब उस धूल से सने कट्टे को खोला गया, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें फटी की फटी रह गईं.

उसमें अनाज या सीमेंट नहीं, बल्कि फौज के असली, जिंदा कारतूस (Live Cartridges) भरे हुए थे! एक-दो नहीं, बल्कि पूरे 1,100 से 1,400 राउंड!    

2. पुलिस और आर्मी इंटेलिजेंस की एंट्री

खबर मिलते ही थानाधिकारी (SHO) भजन लाल अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और तुरंत पूरे इलाके को सील कर दिया. पुलिस ने कारतूसों को प्लास्टिक के टबों में भरकर अपने कब्जे में ले लिया. मामला सेना से जुड़ा होने के कारण आर्मी इंटेलिजेंस के अधिकारी भी तुरंत मौके पर पहुंच गए.   

  • क्या मिला? जंग लगे हुए 7.62mm के SLR कारतूस.
  • कितने मिले? करीब 1400.
  • हालत: पुराने, लेकिन ‘जिंदा’ (Live) और खतरनाक.

3. आखिर अस्पताल के नीचे क्या कर रहा था सेना का गोला-बारूद?

यह सबसे बड़ा सवाल है! क्या यह कोई आतंकी साजिश है?  जवाब है: नहीं.

शुरुआती जांच और जानकारों का कहना है कि यह ‘सिस्टम की पुरानी गलती’ हो सकती है.

  1. पुराना आर्मी कैंप: माना जा रहा है कि दशकों पहले इस जमीन पर सेना का कोई अस्थायी कैंप रहा होगा. अभ्यास के बाद बचे हुए गोला-बारूद को वापस जमा कराने की लंबी कागजी कार्रवाई से बचने के लिए किसी ने इसे वहीं जमीन में गाड़ दिया होगा.
  2. एशिया की सबसे बड़ी रेंज: महाजन कोई आम जगह नहीं है. यह एशिया की सबसे बड़ी फील्ड फायरिंग रेंज (MFFR) के पास स्थित है. यहाँ दिन-रात तोपें और टैंक गरजते हैं.

4. महाजन में चल रहा है ‘खतरे का दौर’ (Recent Tragedies)

यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब महाजन रेंज पहले से ही सुर्खियों में है. दिसंबर 2024 का महीना यहाँ के लिए मनहूस साबित हुआ है:

  • 18 दिसंबर: टैंक अभ्यास के दौरान एक बड़ा विस्फोट हुआ, जिसमें 3 जवान शहीद हो गए (आशुतोष मिश्रा, जितेंद्र और ईश्वर तालिया).
  • 15 दिसंबर: तोप (Artillery Gun) को जोड़ते समय हवलदार चंद्र प्रकाश पटेल शहीद हो गए.

एक तरफ रेंज में हादसे, और दूसरी तरफ रिहायशी इलाके (अस्पताल) में कारतूसों का जखीरा—यह बताता है कि यह इलाका सुरक्षा के लिहाज से कितना संवेदनशील है.

5. सियासत भी गरमाई: सीएम का दौरा और कारतूस कांड

दिलचस्प बात यह है कि यह कारतूस तब मिले जब राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा खुद अपनी सरकार के 2 साल पूरे होने पर लूनकरनसर और बीकानेर के दौरे पर थे. वीवीआईपी मूवमेंट के बीच सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह खबर किसी बुरे सपने से कम नहीं थी. गनीमत रही कि यह कोई ताजा साजिश नहीं, बल्कि पुराने दबे हुए मुर्दे (पुराने कारतूस) निकले.   

अब आगे क्या?

फिलहाल पुलिस और बम निरोधक दस्ता (BDS) जांच में जुटा है. सबसे बड़ा डर यह है कि क्या अस्पताल के नीचे और भी बारूद दबा है? प्रशासन को अब पूरी जमीन की स्कैनिंग करानी होगी ताकि मरीजों और डॉक्टरों की जान सुरक्षित रहे.

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