बीकानेर खेजड़ी बचाओ आंदोलन: 500 से अधिक लोगों का अनशन

बीकानेर खेजड़ी बचाओ आंदोलन

बीकानेर खेजड़ी बचाओ आंदोलन वर्तमान में राजस्थान के सबसे बड़े जन-आंदोलनों में से एक बन गया है। फरवरी 2026 की शुरुआत में, बीकानेर कलेक्ट्रेट के बाहर एक अभूतपूर्व दृश्य देखा गया जहाँ पर्यावरण संरक्षण की मांग को लेकर ‘आर-पार’ की लड़ाई शुरू हो गई है । इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य राजस्थान के राज्य वृक्ष खेजड़ी को सौर ऊर्जा परियोजनाओं के नाम पर होने वाली अंधाधुंध कटाई से बचाना है।   

सोमवार, 2 फरवरी 2026 को बीकानेर में आयोजित महापड़ाव के बाद यह आंदोलन और भी उग्र हो गया है । प्रशासन की उदासीनता और सौर कंपनियों की कार्यप्रणाली के विरुद्ध अब जनता सीधे मैदान में उतर चुकी है।   

बीकानेर खेजड़ी बचाओ आंदोलन: अनशन और सत्याग्रह का स्वरूप

इस आंदोलन की सबसे बड़ी विशेषता इसका अनुशासित और समर्पित स्वरूप है। बीकानेर खेजड़ी बचाओ आंदोलन के तहत वर्तमान में निम्नलिखित प्रमुख घटनाक्रम हो रहे हैं:

  • 500 से अधिक अनशनकारी: 500 से अधिक लोगों ने अन्न का त्याग कर दिया है और मांग पूरी न होने तक अनशन जारी रखने का संकल्प लिया है ।   
  • 363 संतों का विशिष्ट विरोध: 1730 के ऐतिहासिक खेजड़ली बलिदान की याद में 363 संतों और भक्तों ने अपनी आँखों पर काली पट्टियाँ बांधकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया है । यह संख्या उस बलिदान का प्रतीक है जहाँ अमृता देवी बिश्नोई के नेतृत्व में 363 लोगों ने पेड़ों के लिए प्राण दिए थे ।   
  • महिलाओं की सक्रिय भागीदारी: अनशन स्थलों पर बड़ी संख्या में महिलाएं भी मौजूद हैं, जो इस आंदोलन को एक व्यापक सामाजिक आधार प्रदान कर रही हैं ।   

सौर ऊर्जा परियोजनाएं और खेजड़ी का विनाश

बीकानेर खेजड़ी बचाओ आंदोलन का मुख्य कारण हरित ऊर्जा के नाम पर हो रहा पारिस्थितिक विनाश है।

पेड़ों की कटाई का भयावह आंकड़ा

पर्यावरण वैज्ञानिकों और स्थानीय कार्यकर्ताओं के अनुसार, सौर संयंत्रों की स्थापना के लिए बीकानेर जिले में पिछले 14 वर्षों में लगभग 5,00,000 पेड़ काटे जा चुके हैं । पूरे पश्चिमी राजस्थान में यह संख्या 30 लाख से भी अधिक होने का अनुमान है ।   

सौर कंपनियों पर गंभीर आरोप

आंदोलनकारियों का आरोप है कि सौर कंपनियां सबूत मिटाने के लिए रात में पेड़ों को उखाड़ती हैं और उन्हें जमीन में दफना देती हैं या जला देती हैं । उदाहरण के लिए, बीकानेर के लखासर गाँव में जुलाई 2025 में एक ही दिन में 400 खेजड़ी के पेड़ काट दिए गए थे । मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए यह ‘पारिस्थितिक आत्महत्या’ के समान है ।   

राजनीतिक समर्थन और नेतृत्व

बीकानेर खेजड़ी बचाओ आंदोलन को राज्य के प्रमुख राजनेताओं का समर्थन प्राप्त हुआ है, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ा है:

  • रविंद्र सिंह भाटी (विधायक, शिव): भाटी ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार जल्द ही सख्त कानून नहीं लाती है, तो वे बीकानेर से जयपुर तक मार्च करेंगे और विधानसभा का घेराव करेंगे । उन्होंने युवाओं से इस ‘आर-पार’ की लड़ाई में जुटने का आह्वान किया है ।   
  • विपक्षी दलों की भूमिका: कांग्रेस और भाजपा दोनों के कई नेता इस मुद्दे पर एक साथ नजर आए हैं। पूर्व मंत्री गोविंद राम मेघवाल और विधायक प्रताप पुरी जैसे नेताओं ने भी धरने को अपना समर्थन दिया है ।   

आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें

बीकानेर खेजड़ी बचाओ आंदोलन की मांगें केवल मौखिक आश्वासनों तक सीमित नहीं हैं, वे कानूनी बदलाव चाहते हैं:

  1. सख्त वृक्ष संरक्षण अधिनियम (Tree Protection Act): प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि राज्य में एक प्रभावी ट्री प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया जाए जो सौर कंपनियों द्वारा खेजड़ी की कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए ।   
  2. जुर्माने में वृद्धि: वर्तमान में खेजड़ी काटने पर जुर्माना बहुत कम है। आंदोलनकारी इसे बढ़ाकर ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) प्रति पेड़ करने की मांग कर रहे हैं ।   
  3. दोषियों पर कार्रवाई: अवैध कटाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कंपनी अधिकारियों के खिलाफ गैर-जमानती धाराएं लगाने की मांग की जा रही है।

सरकार का रुख और कानूनी स्थिति

आंदोलन के बढ़ते दबाव के बीच, संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने घोषणा की है कि सरकार वर्तमान विधानसभा सत्र में वृक्ष संरक्षण के लिए एक नया विधेयक (Draft Bill 2026) लाएगी。 इसके तहत जुर्माने को दस गुना बढ़ाने और हर एक पेड़ के बदले 10 नए पेड़ लगाने का प्रावधान प्रस्तावित है。 हालांकि, आंदोलनकारी केवल लिखित गारंटी और अधिनियम के लागू होने पर ही अनशन समाप्त करने की बात कर रहे हैं ।   


बीकानेर खेजड़ी बचाओ आंदोलन आज न केवल पेड़ों को बचाने की मुहिम है, बल्कि यह मरुस्थल की संस्कृति और भविष्य को सुरक्षित करने का संघर्ष है। 500 अनशनकारियों का यह संकल्प राजस्थान सरकार के लिए एक बड़ी परीक्षा है कि वह ‘ग्रीन एनर्जी’ और ‘ग्रीन इकोलॉजी’ के बीच कैसे संतुलन बनाती है।