बीकानेर खेजड़ी आंदोलन की बड़ी जीत: सरकार के लिखित आश्वासन के बाद अनशन खत्म, कटाई पर पूर्ण रोक

बीकानेर खेजड़ी आंदोलन

बीकानेर खेजड़ी आंदोलन (Bikaner Khejri Bachao Andolan) अब राजस्थान के पर्यावरण संरक्षण के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। बीकानेर कलेक्ट्रेट के सामने पिछले चार दिनों से जारी महापड़ाव और आमरण अनशन आखिरकार गुरुवार शाम को राज्य सरकार के लिखित आश्वासन के बाद समाप्त हो गया 。 सरकार ने आंदोलनकारियों की मुख्य मांगों को स्वीकार करते हुए जोधपुर और बीकानेर संभाग में खेजड़ी की कटाई पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है और एक सख्त ‘ट्री प्रोटेक्शन एक्ट’ (Tree Protection Act) लाने की आधिकारिक घोषणा की है

ऐतिहासिक जीत: 363 लोगों के संकल्प ने झुकाई सरकार

इस आंदोलन की तीव्रता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 3 फरवरी को 1730 के ऐतिहासिक खेजड़ली बलिदान की याद में 363 लोगों ने एक साथ आमरण अनशन शुरू किया था。 देखते ही देखते अनशनकारियों की संख्या 480 तक पहुँच गई, जिनमें 29 संत और 60 से अधिक महिलाएं शामिल थीं 。 आंदोलन के चौथे दिन तक कई प्रदर्शनकारियों का स्वास्थ्य बिगड़ने लगा, जिसके बाद प्रशासन को धरना स्थल पर ही 75-75 बेड के दो अस्थायी अस्पताल बनाने पड़े

पर्यावरण कार्यकर्ता मुखराम धरणिया और कई संतों को गंभीर हालत में पीबीएम (PBM) अस्पताल में भर्ती करना पड़ा, जिससे सरकार पर भारी नैतिक दबाव बन गया 。 इस संघर्ष को पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, अशोक गहलोत और विधायक रविन्द्र सिंह भाटी जैसे दिग्गज नेताओं का भी खुला समर्थन मिला

सोलर प्रोजेक्ट्स और पर्यावरण का टकराव

बीकानेर खेजड़ी आंदोलन का मुख्य कारण पश्चिमी राजस्थान में बड़े पैमाने पर लग रहे सौर ऊर्जा संयंत्र (Solar Power Plants) हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि SJVN Green Energy और Ayana Renewable Power जैसी कंपनियाँ अपनी परियोजनाओं के लिए हज़ारों की संख्या में खेजड़ी के पेड़ों को काट रही हैं 。 एक अध्ययन के अनुसार, पिछले 10-15 वर्षों में इस क्षेत्र में लगभग 50 लाख (5 मिलियन) पेड़ काटे जा चुके हैं

आंदोलनकारियों का कहना है कि वर्तमान कानून के तहत अवैध कटाई पर मात्र 100 रुपये का मामूली जुर्माना है, जो कंपनियों को रोकने में विफल रहा है 。 इसीलिए मांग उठाई गई कि जुर्माने को बढ़ाकर 1 लाख रुपये किया जाए और इसे एक गैर-जमानती अपराध घोषित किया जाए

नया वृक्ष संरक्षण अधिनियम (Tree Protection Act) क्या है?

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने विधानसभा में ऐतिहासिक घोषणा करते हुए कहा कि सरकार खेजड़ी को बचाने के लिए एक विशेष ‘वृक्ष संरक्षण अधिनियम’ लाएगी 。 इस नए कानून के प्रमुख संभावित प्रावधान इस प्रकार होंगे:

  • सख्त जुर्माना: खेजड़ी की अवैध कटाई पर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना 。
  • गैर-जमानती अपराध: पेड़ काटने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को और अधिक सख्त बनाया जाएगा。
  • अनिवार्य वृक्षारोपण: यदि किसी अपरिहार्य स्थिति में एक पेड़ काटा जाता है, तो उसके बदले 10 नए खेजड़ी के पेड़ लगाना अनिवार्य होगा 。
  • राजस्व भूमि पर नियंत्रण: राजस्व भूमि पर भी पेड़ों की सुरक्षा के लिए कलेक्टर की पूर्व अनुमति आवश्यक होगी 。

सौर ऊर्जा उद्योग की नई पहल: 10 लाख पेड़ों का लक्ष्य

बढ़ते विरोध और नई नीति को देखते हुए राजस्थान सोलर एसोसिएशन (RSA) और नेशनल सोलर एनर्जी फेडरेशन ऑफ इंडिया (NSEFI) ने भी अपनी ज़िम्मेदारी स्वीकार की है। उद्योग ने घोषणा की है कि वे वर्ष 2028 तक जैसलमेर, बीकानेर और बाड़मेर जैसे सौर ऊर्जा केंद्रों में 10 लाख (1 मिलियन) खेजड़ी के पेड़ लगाएंगे 。 इन पेड़ों की जियो-टैगिंग की जाएगी ताकि भविष्य में इनकी निगरानी की जा सके

खेजड़ली बलिदान की विरासत

यह संघर्ष 1730 ईस्वी के उस ऐतिहासिक बलिदान की याद दिलाता है, जहाँ अमृता देवी विश्नोई के नेतृत्व में 363 लोगों ने खेजड़ी के पेड़ों को गले लगाकर अपने प्राणों की आहुति दे दी थी बीकानेर खेजड़ी आंदोलन के संतों ने स्पष्ट किया है कि भले ही आमरण अनशन खत्म हो गया है, लेकिन जब तक विधानसभा में पूर्ण कानून पारित नहीं हो जाता, तब तक उनका सांकेतिक धरना और निगरानी जारी रहेगी

यह आंदोलन राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक संदेश है कि विकास की गति पर्यावरण की कीमत पर नहीं होनी चाहिए। राज्य के ‘कल्पवृक्ष’ खेजड़ी का संरक्षण अब केवल एक सामुदायिक मुद्दा नहीं, बल्कि एक सरकारी प्राथमिकता बन चुका है।

अनशन का घटनाक्रम और बढ़ता दबाव

3 फरवरी 2026 को ऐतिहासिक खेजड़ली बलिदान (1730 ई.) की याद में 363 लोगों ने आमरण अनशन शुरू किया था, जिनकी संख्या बाद में बढ़कर 480 तक पहुँच गई। संतों के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन ने तब उग्र रूप ले लिया जब कई अनशनकारियों की तबीयत बिगड़ने लगी और उन्हें पीबीएम (PBM) अस्पताल में भर्ती करना पड़ा

आंदोलन की तीव्रता को देखते हुए पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, अशोक गहलोत और विधायक रविन्द्र सिंह भाटी जैसे बड़े नेताओं ने भी अपना समर्थन दिया, जिससे सरकार पर भारी दबाव बन गया

सोलर प्रोजेक्ट्स और खेजड़ी का संघर्ष

आंदोलनकारियों का मुख्य आरोप था कि SJVN और Ayana Renewable Power जैसी सौर ऊर्जा कंपनियाँ विकास के नाम पर हज़ारों की संख्या में खेजड़ी के पेड़ों को काट रही हैं । एक अध्ययन के अनुसार, पिछले एक दशक में सौर संयंत्रों के लिए पश्चिमी राजस्थान में लगभग 50 लाख पेड़ काटे जा चुके हैं ।

वर्तमान में खेजड़ी काटने पर मात्र 100 रुपये का मामूली जुर्माना है, जिसे नई नीति के तहत बढ़ाकर 1 लाख रुपये तक करने और प्रत्येक कटे हुए पेड़ के बदले 10 नए पेड़ लगाने की मांग की गई है

भविष्य की रणनीति

हालाँकि लिखित आश्वासन के बाद आमरण अनशन समाप्त कर दिया गया है, लेकिन आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक विधानसभा में ‘ट्री एक्ट’ पारित होकर लागू नहीं हो जाता, तब तक उनका सांकेतिक धरना और निगरानी जारी रहेगी

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