बीकानेर | राजस्थान के बीकानेर जिले में खाकी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अपराधी चाहे पाताल में भी छिप जाए, कानून के हाथ उस तक पहुंच ही जाते हैं. नापासर थाना क्षेत्र में 12वीं की छात्रा के साथ चलती कार में हुए सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) के मामले में पुलिस ने “हॉट परसूट” (Hot Pursuit) का नायाब उदाहरण पेश किया है. घटना के बाद 5 दिनों तक डरी-सहमी पीड़िता की चुप्पी टूटने के महज 48 घंटों के भीतर पुलिस ने मुख्य आरोपी को गुजरात से दबोचकर उसका “खेल खत्म” कर दिया है.
यह मामला न केवल महिला सुरक्षा पर सवाल खड़े करता है, बल्कि पुलिस की त्वरित तकनीकी जांच (Technical Investigation) की भी एक केस स्टडी है.
घटना 6 जनवरी 2026 की है. पीड़ित छात्रा, जो कक्षा 12वीं में पढ़ती है, रोज की तरह स्कूल जाने के लिए निकली थी. उसे क्या पता था कि जिस “जान-पहचान” पर वह भरोसा कर रही है, वही उसकी जिंदगी में अंधेरा घोल देगा.
पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी पीड़िता का पूर्व परिचित था. उसने छात्रा को रास्ते में रोका और स्कूल छोड़ने के बहाने अपनी एसयूवी (संभवतः बोलेरो) कार में बैठा लिया. जैसे ही छात्रा गाड़ी में बैठी, कार एक “चलते-फिरते अपराध स्थल” में तब्दील हो गई. आरोपियों ने कार को नापासर और बीकानेर के सुनसान रास्तों पर कई घंटों तक दौड़ाया और इस दौरान छात्रा के साथ बारी-बारी से दरिंदगी की.
इस केस का सबसे चौंकाने वाला पहलू वह 5 दिन का अंतराल था, जिसने आरोपियों को भागने का मौका दे दिया. लोक-लाज और आरोपियों की धमकियों के चलते पीड़िता और उसका परिवार 6 जनवरी से 10 जनवरी तक खामोश रहा. 11 जनवरी (रविवार) को जब परिवार ने हिम्मत जुटाकर नापासर थाने में एफआईआर दर्ज कराई, तब तक आरोपी राजस्थान की सीमा लांघ चुके थे.
यहीं से शुरू हुआ बीकानेर पुलिस का “ऑपरेशन 48 घंटे”.
बीकानेर एसपी कावेंद्र सागर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत स्पेशल टीमों का गठन किया. चुनौती बड़ी थी—सुराग ठंडे पड़ चुके थे और आरोपी मोबाइल बंद कर भाग चुके थे. लेकिन पुलिस ने “ह्यूमन इंटेलिजेंस” से ज्यादा “टेक्निकल सर्विलांस” पर भरोसा जताया.
पुलिस की साइबर सेल ने जब 6 जनवरी के मोबाइल टॉवर डंप और सीसीटीवी फुटेज खंगाले, तो एक संदिग्ध एसयूवी की पहचान हुई. आरोपियों की लोकेशन ट्रेस करते हुए पुलिस को अहम सुराग मिला—वे राजस्थान छोड़कर गुजरात की तरफ भागे हैं. पश्चिमी राजस्थान के अपराधियों के लिए गुजरात अक्सर छिपने का पसंदीदा ठिकाना (“Safe Haven”) माना जाता है.
बिना वक्त गंवाए, बीकानेर पुलिस की एक टीम गुजरात रवाना हुई. स्थानीय पुलिस के सहयोग से, एफआईआर दर्ज होने के 48 घंटे के भीतर ही एक आरोपी को गुजरात के एक ठिकाने से डिटेन (हिरासत में) कर लिया गया. पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी को बीकानेर लाया जा रहा है, जहां उससे दूसरे साथी और अपराध में इस्तेमाल गाड़ी के बारे में पूछताछ की जाएगी.
इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि नए भारतीय न्याय संहिता (BNS-2026) के तहत पुलिस अब पहले से ज्यादा मुस्तैद है. एसपी कावेंद्र सागर की अगुवाई में हुई इस कार्रवाई ने जनता में यह विश्वास जगाया है कि अपराधी चाहे ‘अपना’ हो या ‘पराया’, और चाहे वह किसी भी राज्य में जाकर छिप जाए, बीकानेर पुलिस उसका “गेम ओवर” करके ही दम लेगी.
फिलहाल, पुलिस दूसरे आरोपी की तलाश में दबिश दे रही है और उम्मीद है कि जल्द ही वह भी सलाखों के पीछे होगा.
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