खाजूवाला (बीकानेर) — सीमावर्ती क्षेत्र खाजूवाला में यूरिया खाद की गंभीर कमी ने किसानों को बेहाल कर दिया है। पहले डीएपी और अब यूरिया की किल्लत से रबी फसल के उत्पादन पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। अन्नदाता खुलेआम अपनी पीड़ा बयां कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और कृषि विभाग मौन साधे बैठे हैं।
खाजूवाला क्षेत्र के किसानों का कहना है कि लगातार बढ़ते खाद संकट से रबी की फसल का उत्पादन घटने की पूरी आशंका है। इस बार अधिकांश सिंचित क्षेत्र में फसल की बिजाई हुई है और पिछले वर्ष की तुलना में रकबा भी बढ़ा है, जिसके चलते खाद की मांग स्वाभाविक रूप से बढ़ी है। लेकिन आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह से धराशायी नजर आ रही है।
स्थानीय किसान रामलाल शर्मा ने बताया कि गेहूं की फसल में इस समय यूरिया डालने का सही वक्त है, लेकिन खाद की कमी के कारण फसल को समय पर पोषण नहीं मिल पा रहा। “अगर अभी खाद नहीं मिला तो पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी,” उन्होंने चिंता जताई।
यूरिया और डीएपी खाद के संकट ने प्रशासनिक संवेदनशीलता और सिस्टम की विफलता दोनों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। वर्तमान हालात किसानों की लाचारी और जिम्मेदारों की निष्क्रियता का जीता-जागता प्रमाण बनकर सामने आ रहे हैं। कृषि विभाग पर लगातार सवाल उठ रहे हैं, लेकिन जवाब किसी के पास भी नहीं है।
किसान संगठनों ने इस स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा है कि जब किसान खुलेआम अपनी पीड़ा बयां कर रहे हैं, तो जिम्मेदार अधिकारी और विभाग मौन क्यों हैं? आखिर कब तक अन्नदाता इस बेहाल स्थिति में यूं ही भटकता रहेगा?
इस मामले पर कृषि विभाग के एक अधिकारी ने कहा, “अबकी बार अधिकांश सिंचित क्षेत्र में फसल की बिजाई हुई है और पिछले वर्ष की तुलना में रकबा भी बढ़ा है, जिसके चलते खाद की मांग भी बढ़ी। हम लगातार प्रयास कर रहे हैं कि क्षेत्र में यूरिया खाद की आवश्यकता के अनुरूप पूर्ति की जा सके। शुक्रवार को 3000 कट्टो का एक स्टॉक पहुंचा भी है।”
हालांकि, किसानों का कहना है कि 3000 बोरी यूरिया पूरे क्षेत्र की जरूरत के सामने नाकाफी है और तत्काल बड़े पैमाने पर आपूर्ति की जरूरत है।
स्थानीय किसान नेताओं ने जिला प्रशासन और कृषि विभाग से मांग की है कि:
ऐसे में अब इंतजार यह है कि आखिर अन्नदाताओं की पुकार कौन सुनेगा और कब सुनेगा। किसानों की यह समस्या जितनी जल्दी हल होगी, रबी फसल के लिए उतना ही बेहतर होगा।
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