बीकानेर | मरुधरा की संस्कृति और ऊंटों के अनूठे संगम का साक्षी बना ‘अंतर्राष्ट्रीय ऊंट उत्सव-2026’ रविवार को रायसर के धोरों में भव्य आतिशबाजी के साथ संपन्न हो गया। तीन दिनों तक चले इस उत्सव में जहाँ विदेशी पर्यटकों ने बीकानेरी संस्कृति का जमकर लुत्फ उठाया, वहीं सौंदर्य प्रतियोगिताओं और ऊंट दौड़ के परिणामों को लेकर हुआ हंगामा भी सुर्खियों में रहा ।
उत्सव का सबसे चर्चित पहलू ‘मिस मरवण’ प्रतियोगिता रही। जूरी ने महक दफ्तरी को वर्ष 2026 की ‘मिस मरवण’ चुना, लेकिन इस फैसले पर जमकर बवाल हुआ। अन्य प्रतिभागियों और दर्शकों के एक बड़े वर्ग ने आरोप लगाया कि निर्णय में पारंपरिक वेशभूषा और आभूषणों की अनदेखी की गई है। विवाद इतना बढ़ा कि प्रतिभागियों ने स्टेज पर चढ़कर अपनी नाराजगी जाहिर की, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया ।
ऊंट दौड़ (Camel Race) में भी इस बार नाटकीय मोड़ देखने को मिला। पहले दौर की रेस के बाद परिणामों को लेकर विवाद हो गया, जिसके बाद आयोजकों को दोबारा रेस करवानी पड़ी। फाइनल अपडेट के अनुसार, दोबारा हुई रेस में ‘गजराज’ नामक ऊंट ने अपनी रफ़्तार का लोहा मनवाते हुए प्रथम स्थान हासिल किया। इससे पहले की रिपोर्ट्स में इमरान के ऊंट को आगे बताया जा रहा था, लेकिन अंतिम बाजी गजराज ने मारी।
राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र (NRCC) में आयोजित ‘फर कटिंग’ प्रतियोगिता ने अंतर्राष्ट्रीय सुर्खियाँ बटोरीं। यहाँ जापान की कलाकार मेगुमी (Megumi) ने ऊंट के शरीर पर कैंची से बारीक नक्काशी उकेर कर सभी को चौंका दिया और प्रतियोगिता में तीसरा स्थान हासिल किया। इस श्रेणी में मोहन सिंह ने पहला स्थान प्राप्त किया ।
उत्सव के दौरान बीकानेर के पवन व्यास ने एक अनोखा विश्व रिकॉर्ड बनाने का दावा पेश किया। उन्होंने बिना किसी जोड़ के 2025 फीट लंबा साफा बांधकर अपनी कला का प्रदर्शन किया, जो उत्सव का एक प्रमुख आकर्षण रहा ।
| प्रतियोगिता | विजेता |
| मिस्टर बीकाणा | योग्य सेवक (Yogya Sevak) |
| मिस मरवण | महक दफ्तरी |
| मिसेज मरवण | साक्षी विजय |
| ऊंट दौड़ (फाइनल) | गजराज (री-रेस के बाद विजेता) |
| ऊंट फर कटिंग | मोहन सिंह (प्रथम), मेगुमी (जापान – तृतीय) |
| ऊंट नृत्य | बजरंग |
| ढोला-मरवण | श्रवण कुमार सोनी और संजू सोनी |
उत्सव के अंतिम दिन रायसर के रेतीले धोरों पर ‘पागी’ (रेत पर पदचिह्न पहचानने वाले विशेषज्ञ) की विलुप्त होती कला का प्रदर्शन किया गया। समापन समारोह में जसनाथी संप्रदाय के अग्नि नृत्य ने दर्शकों की सांसें थाम दीं। लपटों के बीच नर्तकों के ‘फतेह-फतेह’ के उद्घोष के साथ 2026 का यह उत्सव 2027 में फिर मिलने के वादे के साथ विदा हो गया ।
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