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Bikaner Bus Accident: मिलन ट्रेवल्स की बस बनी आग का गोला, 50 यात्रियों की बाल-बाल बची जान

बीकानेर (Bikaner): बुधवार की सुबह राजस्थान के नेशनल हाईवे-11 पर एक दिल दहला देने वाला Bikaner Bus Accident (बीकानेर बस हादसा) सामने आया, जिसने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया। श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में सेसोमू स्कूल (Sesomu School) के पास आज तड़के सुबह 5:15 बजे ‘मिलन ट्रेवल्स’ (Milan Travels) की एक लग्जरी स्लीपर बस और चारे से भरे ट्रेलर के बीच भीषण टक्कर हो गई। गनीमत यह रही कि मौत के मुहाने पर खड़ी बस से सभी 50 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिसे प्रत्यक्षदर्शी किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहे हैं।

धुंध और अंधेरे में हुआ भयानक हादसा

इस Bikaner Bus Accident की मुख्य वजह सुबह के समय छाई घनी धुंध और हाईवे पर लापरवाही से खड़े वाहन को माना जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, मिलन ट्रेवल्स की यह बस (RJ-07-PA-4251) जयपुर से बीकानेर आ रही थी। सेसोमू स्कूल के पास, हाईवे पर पहले से ही एक अन्य दुर्घटना के कारण चारे से भरा एक ट्रेलर सड़क पर खड़ा था। सुबह के अंधेरे और कोहरे के कारण बस चालक को यह खड़ा ट्रेलर दिखाई नहीं दिया।

तेज रफ्तार बस सीधे ट्रेलर के पिछले हिस्से में जा घुसी। चूंकि ट्रेलर में सूखा चारा (Dry Fodder) भरा हुआ था और टक्कर से बस के डीजल टैंक या वायरिंग में शॉर्ट सर्किट हुआ, इसलिए वहां तुरंत आग लग गई। चारे की आग ने पेट्रोल की तरह काम किया और देखते ही देखते पूरी बस आग की लपटों में घिर गई।

जब बस बन गई ‘मौत का लॉकअप’ (The Auto-Lock Failure)

इस Bikaner Bus Accident को जो बात सबसे ज्यादा खौफनाक बनाती है, वह है बस का ‘ऑटो-लॉक सिस्टम’ फेल होना। टक्कर लगते ही बस का इलेक्ट्रिक सिस्टम ठप हो गया। आधुनिक एसी बसों में सुरक्षा के लिए लगाए गए ‘न्यूमेटिक डोर’ (Pneumatic Doors) जाम हो गए।

अंदर बैठे 50 यात्री धुएं के गुबार में फंस गए थे। आग की लपटें बस के अगले हिस्से (केबिन) को अपनी चपेट में ले चुकी थीं और मुख्य दरवाजा खुलने का नाम नहीं ले रहा था। यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। यह मंजर 2025 के बुलढाणा बस हादसे की याद दिलाने वाला था, लेकिन यहाँ किस्मत ने कुछ और ही लिखा था।

‘इमरजेंसी गेट’ ने बचाई 50 जिंदगियां

इस Bikaner Bus Accident में अगर कोई ‘हीरो’ साबित हुआ, तो वह था बस का पीछे वाला ‘इमरजेंसी गेट’। जैसे ही यात्रियों को अहसास हुआ कि मुख्य दरवाजा नहीं खुलेगा, बस स्टाफ और कुछ सूझबूझ वाले यात्रियों ने तुरंत पीछे की तरफ दौड़ लगाई। उन्होंने बिना समय गंवाए आपातकालीन द्वार को खोल दिया।

जिस समय बस धूं-धूं कर जल रही थी, यात्री एक-एक करके इस गेट से हाईवे पर कूदने लगे। स्थानीय लोगों और पुलिस ने भी मौके पर पहुंचकर मदद की। हेड कांस्टेबल बलवीर सिंह काजला ने बताया कि अगर इमरजेंसी गेट खुलने में 2 मिनट की भी देरी होती, तो यह राजस्थान के इतिहास का सबसे दर्दनाक हादसा हो सकता था। सभी यात्रियों के बाहर निकलते ही पूरी बस जलकर लोहे के कंकाल में तब्दील हो गई।

श्रीडूंगरगढ़: हादसों का ‘ब्लैक स्पॉट’

स्थानीय नागरिकों में इस Bikaner Bus Accident के बाद भारी आक्रोश है। श्रीडूंगरगढ़ का यह इलाका (सेसोमू स्कूल के पास) हादसों का ‘ब्लैक स्पॉट’ बन चुका है। गौरतलब है कि नवंबर 2019 में भी ठीक इसी जगह के आसपास एक भीषण बस-ट्रक टक्कर हुई थी, जिसमें 14 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। बार-बार हो रहे हादसों के बावजूद, हाईवे पर अवैध रूप से खड़े वाहनों और चारे से ओवरलोडेड ट्रकों पर लगाम नहीं लग पा रही है।

प्रशासन के लिए यह Bikaner Bus Accident एक और चेतावनी है। हाईवे पेट्रोलिंग की कमी के कारण दुर्घटनाग्रस्त वाहन घंटों तक सड़क पर खड़े रहते हैं, जो दूसरी दुर्घटनाओं (Secondary Collisions) का कारण बनते हैं, जैसा कि आज मिलन ट्रेवल्स की बस के साथ हुआ।

यात्रियों के लिए सबक और सुरक्षा गाइडलाइन

आज के इस Bikaner Bus Accident ने साबित कर दिया है कि स्लीपर बसों में सफर करते समय सुरक्षा नियमों की जानकारी होना जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर हो सकता है।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि बस में बैठते ही सबसे पहले चेक करें:

  1. इमरजेंसी एग्जिट कहां है? (अक्सर यह पीछे या बीच में दाईं तरफ होता है)।
  2. हैमर (Hammer) की स्थिति: कांच तोड़ने वाला हथौड़ा अपनी जगह पर है या नहीं?
  3. मैनुअल डोर रिलीज: क्या आप जानते हैं कि ऑटो-लॉक फेल होने पर दरवाजे को हवा का दबाव हटाकर (Air Release Valve) कैसे खोला जाता है?

फिलहाल, इस Bikaner Bus Accident में बस चालक को चोटें आई हैं और उसे पीबीएम अस्पताल (PBM Hospital) रेफर किया गया है। यात्रियों का लाखों का सामान जलकर राख हो गया है, लेकिन वे अपनी जान बचने को ही सबसे बड़ी दौलत मान रहे हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है कि आखिर सड़क पर खड़ा ट्रेलर बिना सुरक्षा संकेतों के वहां क्यों छोड़ा गया था।

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