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बीकानेर: एसीबी ने पब्लिक प्रॉसिक्यूटर को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा, नोट चबाने की कोशिश नाकाम

बीकानेर | राजस्थान में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी सख्त कार्रवाई को जारी रखते हुए बीकानेर जिला न्यायालय परिसर में एक बड़ी कार्रवाई की। एसीबी ने विशेष अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) कोर्ट के पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (पीपी) जगदीश कुमार को 500 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एसीबी) आशीष कुमार के नेतृत्व में सीआई इन्द्र कुमार और उनकी टीम ने की।

रिश्वत का मामला और ट्रैप

एसीबी को एक परिवादी ने शिकायत दी थी कि पीपी जगदीश कुमार एक केस में मदद करने के बदले 1000 रुपये की रिश्वत मांग रहा था। जांच के दौरान यह सामने आया कि जगदीश ने पहले ही 500 रुपये रिश्वत के रूप में ले लिए थे। इसके बाद एसीबी ने सावधानीपूर्वक ट्रैप ऑपरेशन की योजना बनाई। 15 जुलाई को जब परिवादी ने बचे हुए 500 रुपये दिए, तो एसीबी ने जगदीश कुमार को रंगे हाथों पकड़ लिया।

नोट चबाने की कोशिश

ट्रैप के दौरान जगदीश कुमार ने सबूत मिटाने की मंशा से रिश्वत के नोटों को मुंह में डालकर चबाने की कोशिश की। हालांकि, एसीबी की तत्पर टीम ने उसे तुरंत रोक लिया और नोट बरामद किए। यह घटना जगदीश की गलत मंशा को और उजागर करती है।

कानूनी कार्रवाई शुरू

एसीबी ने जगदीश कुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई है। एसीबी अब जगदीश के पुराने रिकॉर्ड और अन्य संभावित भ्रष्टाचार के मामलों की जांच कर रही है, जिससे इस केस में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

एसीबी की सक्रियता

राजस्थान में एसीबी ने हाल के महीनों में भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी कार्रवाई को और तेज किया है। पुलिस, प्रशासनिक और अब न्यायिक अधिकारियों को रिश्वत लेते हुए पकड़ा जा रहा है। बीकानेर में यह कार्रवाई इस बात का सबूत है कि एसीबी भ्रष्टाचार के खिलाफ किसी भी स्तर पर समझौता नहीं करेगी।

जनता और न्यायिक प्रणाली पर प्रभाव

पब्लिक प्रॉसिक्यूटर जैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठे व्यक्ति का रिश्वत लेते पकड़ा जाना न्यायिक प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है। खासकर एससी-एसटी कोर्ट जैसे संवेदनशील मामलों में कार्यरत अधिकारी का ऐसा कृत्य सामाजिक न्याय की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। इस कार्रवाई से जनता में भ्रष्टाचार के खिलाफ विश्वास तो बढ़ेगा, लेकिन यह भी सवाल उठता है कि क्या अन्य अधिकारियों की गतिविधियों पर भी नजर रखने की जरूरत है।

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