UGC New Rules 2026: देश भर के शिक्षण संस्थानों में मचे घमासान के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के बहुचर्चित और विवादित ‘इक्विटी रेगुलेशंस 2026’ को लागू करने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि ये नियम अस्पष्ट हैं और समाज को बांटने का काम कर सकते हैं । यह फैसला उन लाखों छात्रों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जो पिछले 15 दिनों से सड़कों पर उतरकर इन नियमों का विरोध कर रहे थे।
लेकिन इस फैसले को गहराई से समझने के लिए हमें सबसे पहले यह जानना होगा कि आखिर यह संस्था (UGC) है क्या, और इसके एक नियम ने पूरे देश में इतना बड़ा बवाल (Uproar) क्यों खड़ा कर दिया?
आखिर क्या है UGC? (What is UGC?)
साधारण भाषा में समझें तो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University Grants Commission – UGC) भारतीय उच्च शिक्षा का ‘सुप्रीम कमांडर’ है।
- स्थापना और अधिकार: UGC का गठन 28 दिसंबर 1953 को हुआ था और 1956 में संसद के एक अधिनियम (UGC Act, 1956) द्वारा इसे एक वैधानिक निकाय (Statutory Body) बनाया गया । यह भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय (MoE) के अंतर्गत आता है।
- मुख्य काम (Mandate): इसका काम केवल पैसा बांटना नहीं है। इसके पास दोहरी ताकत है:
- अनुदान (Grants): यह केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों को फंड देता है। बिना इसके पैसे के कई सरकारी यूनिवर्सिटीज का चलना मुश्किल है ।
- मानक तय करना (Regulation): यह तय करता है कि कॉलेज में पढ़ाई कैसी होगी, प्रोफेसर की योग्यता क्या होगी और डिग्री की वैल्यू क्या होगी। अगर कोई कॉलेज UGC के नियमों (Regulations) को नहीं मानता, तो UGC उसकी मान्यता रद्द कर सकता है और फंड रोक सकता है । इसीलिए, जब UGC कोई नियम बनाता है, तो वह महज सलाह नहीं होती, बल्कि उसे कानून की तरह मानना पड़ता है।
क्या हैं UGC New Rules 2026 और क्यों हुआ विवाद?
13 जनवरी 2026 को UGC ने ‘Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026’ जारी किया। इसका उद्देश्य कैंपसों में जातिगत भेदभाव (Caste Discrimination) को रोकना था। यह कदम रोहित वेमुला और पायल तडवी जैसे छात्रों की आत्महत्या की घटनाओं के बाद उठाया गया था, ताकि आरक्षित वर्ग (SC/ST/OBC) के छात्रों को सुरक्षा मिल सके ।
हालाँकि, UGC New Rules 2026 के प्रावधानों ने सामान्य वर्ग (General Category) के छात्रों के बीच डर और गुस्से का माहौल पैदा कर दिया। विरोध के मुख्य कारण ये थे:
- भेदभाव की एकतरफा परिभाषा: नए नियमों में ‘जातिगत भेदभाव’ की परिभाषा में केवल SC, ST और OBC छात्रों को पीड़ित माना गया। छात्रों का तर्क था कि भेदभाव किसी के साथ भी हो सकता है। अगर किसी सामान्य वर्ग के छात्र को उसकी जाति के आधार पर निशाना बनाया जाए, तो नए नियमों में उसके लिए इंसाफ का कोई रास्ता नहीं था ।
- झूठी शिकायतों का डर: पुराने नियमों (2012) के विपरीत, नए नियमों में झूठी शिकायत (False Complaint) करने वालों के खिलाफ दंड का प्रावधान हटा दिया गया था। छात्रों को डर था कि इसका इस्तेमाल आपसी रंजिश निकालने या ‘रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन’ (Reverse Discrimination) के लिए किया जा सकता है ।
- कमेटी में जगह नहीं: शिकायतों की सुनवाई करने वाली ‘इक्विटी कमेटियों’ में SC/ST/OBC और महिलाओं के लिए आरक्षण अनिवार्य था, लेकिन सामान्य वर्ग का कोई प्रतिनिधित्व सुनिश्चित नहीं किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने इसे “नेचुरल जस्टिस” (प्राकृतिक न्याय) के खिलाफ बताया ।
सुप्रीम कोर्ट ने रोक क्यों लगाई? (Why the Supreme Court Stayed It)
मामला जब सुप्रीम कोर्ट पहुँचा, तो मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमलिया बागची की बेंच ने UGC की क्लास लगा दी। कोर्ट ने UGC New Rules 2026 पर रोक लगाते हुए जो तर्क दिए, वे बेहद अहम हैं:
- “समाज को बांटने वाला”: CJI ने सुनवाई के दौरान कहा, “पिछले 75 सालों में हमने एक जातिविहीन समाज बनाने की दिशा में जो कुछ हासिल किया है, क्या हम अब वापस पीछे जा रहे हैं? ये नियम समाज को जोड़ने के बजाय उसे बांटने (Divide) का काम करेंगे” ।
- हॉस्टल में अलगाव का खतरा: कोर्ट ने नियमों के उस हिस्से पर भारी आपत्ति जताई जिससे हॉस्टलों में जाति के आधार पर छात्रों को अलग-अलग रखने (Segregation) की नौबत आ सकती थी। कोर्ट ने कहा, “भगवान के लिए ऐसा मत कीजिए। हॉस्टल में सभी समुदायों के छात्र साथ रहते हैं, वहां अंतरजातीय विवाह भी होते हैं” ।
- रैगिंग की अनदेखी: कोर्ट ने एक बहुत ही व्यावहारिक सवाल पूछा—”अगर किसी आरक्षित वर्ग का सीनियर छात्र किसी सामान्य वर्ग के जूनियर की रैगिंग करता है, तो क्या उसे सजा नहीं मिलनी चाहिए?” कोर्ट ने पाया कि नए नियम इस स्थिति में सामान्य छात्र को सुरक्षा देने में नाकाम हैं ।
- अस्पष्टता (Vagueness): कोर्ट ने कहा कि नियम पहली नजर में ही “अस्पष्ट” (Vague) हैं और इनका दुरुपयोग (Misuse) हो सकता है ।
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद की स्थिति यह है:
- UGC New Rules 2026 अभी लागू नहीं होंगे (Suspended)।
- फिलहाल के लिए 2012 के पुराने नियम ही लागू रहेंगे, जिनमें भेदभाव की परिभाषा व्यापक थी और सभी के लिए सुरक्षा थी ।
- कोर्ट ने सुझाव दिया है कि एक विशेषज्ञ समिति (Expert Committee) बनाई जाए जो इन नियमों को दोबारा और सही तरीके से तैयार करे, ताकि किसी भी वर्ग के साथ अन्याय न हो ।
अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 को होगी। तब तक के लिए देश भर के कैंपसों में शांति लौटने की उम्मीद है, लेकिन यह बहस अभी जारी है कि “समानता” (Equity) के नाम पर लाए गए नियम क्या वाकई समानता ला रहे थे या नई दीवारें खड़ी कर रहे थे।
