जयपुर। राजस्थान में अरावली पर्वतमाला को बचाने के लिए पर्यावरण प्रेमियों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय ग्रामीणों ने एकजुट होकर खनन के खिलाफ व्यापक आंदोलन शुरु कर दिया है। राजस्थान के कई जिलों — अलवर, भरतपुर, सिरोही और उदयपुर — में लोग अवैध खनन और पहाड़ियों के कटान के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं।
विरोध की वजह
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि अरावली पर्वत श्रृंखला में वर्षों से चल रहा अवैध खनन पर्यावरण और भूजल संतुलन के लिए खतरा बन गया है। ये पर्वत श्रृंखला न केवल राजस्थान बल्कि हरियाणा और दिल्ली क्षेत्र के लिए प्राकृतिक “ग्रीन बैरियर” का काम करती है, जो रेगिस्तान की रेत और गर्म हवाओं को रोकती है। लगातार खनन से पर्वतमाला की ऊंचाई और हरियाली में भारी कमी आई है।
विरोध प्रदर्शन और जन समर्थन
हाल के दिनों में अरावली क्षेत्र के कई गांवों में ग्रामीणों, किसानों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने धरना-प्रदर्शन शुरू किया है। अलवर के तिजारा, किशनगढ़बास और भरतपुर के बयाना क्षेत्र में नुक्कड़ सभाएं और पदयात्राएं की जा रही हैं। आंदोलनकारियों ने मांग की है कि सरकार तत्काल अवैध खनन रोके, पर्यावरणीय जांच कराए और अरावली क्षेत्र को संरक्षण क्षेत्र घोषित करे।
सरकार और प्रशासन का रुख
राज्य सरकार ने विरोध प्रदर्शनों पर संज्ञान लेते हुए संबंधित जिलों के कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। वहीं, पर्यावरण विभाग ने कहा है कि गैरकानूनी खनन करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी और पर्वतमाला के संरक्षण के लिए विशेष योजना तैयार की जा रही है।
पर्यावरण विशेषज्ञों की चेतावनी
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अरावली क्षेत्र में खनन नहीं रुका तो इसका असर राजस्थान के मौसम, जल संसाधनों और स्थानीय जैवविविधता पर गंभीर पड़ेगा। अरावली को बचाना राज्य के पर्यावरणीय संतुलन और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए आवश्यक है।
