हनुमानगढ़। लंबे समय से चल रहे किसान विरोध और हाल ही में हुई हिंसक घटनाओं के बाद कंपनी प्रबंधन ने हनुमानगढ़ के टिब्बी क्षेत्र में प्रस्तावित एथेनॉल फैक्ट्री को नहीं लगाने का निर्णय लिया है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि अब यह फैक्ट्री राजस्थान के बाहर किसी अन्य राज्य में स्थापित की जाएगी। इस फैसले को किसानों की बड़ी जीत माना जा रहा है।
क्यों हुआ विरोध?
हनुमानगढ़ के टिब्बी क्षेत्र के राठीखेड़ा गांव में एथेनॉल फैक्ट्री का निर्माण प्रस्तावित था। स्थानीय किसानों और ग्रामीणों ने शुरुआत से ही इसका विरोध किया। उनका कहना था कि फैक्ट्री से क्षेत्र में जल प्रदूषण बढ़ेगा और खेती पर विपरीत असर पड़ेगा। इसी मुद्दे को लेकर किसानों ने कई बार धरने-प्रदर्शन किए और दो बार महापंचायत भी बुलाई।
हिंसक घटना और आगजनी
10 दिसंबर को टिब्बी में हुई महापंचायत के बाद जब किसान फैक्ट्री की ओर बढ़े तो पुलिस प्रशासन ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इससे स्थिति बेकाबू हो गई और फैक्ट्री परिसर में आगजनी व तोड़फोड़ हुई। कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया और भारी नुकसान हुआ।
प्रशासनिक कार्रवाई
घटना के बाद राज्य सरकार ने एक जांच कमेटी गठित की जिसमें वन एवं पर्यावरण विभाग के विशिष्ट शासन सचिव, हनुमानगढ़ कलेक्टर, पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के वरिष्ठ अभियंता और भूजल विभाग के मुख्य अभियंता शामिल थे। यह कमेटी फैक्ट्री को लेकर जल प्रदूषण और पर्यावरणीय प्रभाव का अध्ययन कर रही थी।
हिंसा के बाद 100 से अधिक किसानों पर एफआईआर दर्ज की गई और कई किसान हिरासत में भी लिए गए। इसके विरोध में किसानों ने 17 दिसंबर को धानमंडी में फिर से महापंचायत की और प्रशासन को 20 दिन का अल्टीमेटम दिया। किसानों ने चेतावनी दी थी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो 7 जनवरी को संगरिया में विशाल महापंचायत की जाएगी।
कंपनी का बयान
कंपनी प्रबंधन ने कहा कि क्षेत्र में लगातार तनाव और विरोध की स्थिति के कारण अब वे टिब्बी में एथेनॉल फैक्ट्री नहीं लगाएंगे। साथ ही कंपनी ने खुलासा किया कि अन्य कई राज्य सरकारों से उन्हें निवेश के प्रस्ताव मिले हैं और अब फैक्ट्री राजस्थान के बाहर स्थापित की जाएगी।
