आयुष्मान हार्ट अस्पताल विवाद: हाईकोर्ट ने प्रशासन को 15 दिन का समय दिया


बीकानेर के आयुष्मान हार्ट अस्पताल के बाहर हुए विरोध प्रदर्शन के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। जोधपुर पीठ की जस्टिस नूपुर भाटी ने बीकानेर जिला प्रशासन को आदेश दिया है कि अस्पताल प्रबंधन की शिकायत पर 15 दिनों के भीतर निर्णय लिया जाए।


मामला क्या है?

आयुष्मान हार्ट अस्पताल के संचालकों ने हाईकोर्ट में अर्जी लगाई थी कि उनके अस्पताल के सामने बिना किसी अनुमति के लंबे समय तक धरना दिया गया। अस्पताल की ओर से कहा गया कि इससे न सिर्फ उनके व्यवसाय को नुकसान हुआ, बल्कि मरीजों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।

प्रबंधन ने अपनी याचिका में राजस्थान पुलिस एक्ट 2007 की धारा 44 का उल्लेख करते हुए कहा कि सार्वजनिक स्थान पर किसी भी तरह का प्रदर्शन करने से पहले स्थानीय प्रशासन से मंजूरी लेना अनिवार्य है।


कांग्रेस नेता का था धरना

जानकारी के मुताबिक, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव रामनिवास कूकणा और उनके समर्थकों ने अस्पताल के खिलाफ एक माह तक धरना दिया था। यह विरोध एक मरीज की मौत के बाद शुरू हुआ था, जिसमें परिजनों ने अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाया था।

इस प्रदर्शन के दौरान कलेक्ट्रेट के सामने भी बड़ा प्रदर्शन किया गया था।


हाईकोर्ट ने क्या कहा?

न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि बिना अनुमति के धरना देना कानूनी रूप से सही नहीं है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के 2020 के एक निर्णय का भी संदर्भ लिया, जिसमें कहा गया था कि सार्वजनिक जगहों पर प्रदर्शन के लिए पूर्व अनुमति आवश्यक है।

हाईकोर्ट ने बीकानेर के जिला कलेक्टर और पुलिस सुपरिंटेंडेंट को निर्देश दिया है कि वे 15 दिन के अंदर इस शिकायत की जांच करें और उचित कार्रवाई करें।


कानून क्या कहता है?

राजस्थान पुलिस एक्ट 2007 की धारा 44:

  • सार्वजनिक स्थानों पर धरना या जुलूस के लिए अनुमति जरूरी
  • जिला मजिस्ट्रेट या SP से पूर्व मंजूरी लेनी होती है
  • बिना अनुमति प्रदर्शन पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है

सुप्रीम कोर्ट का फैसला (2020):

  • धरना-प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है
  • लेकिन यह असीमित नहीं हो सकता
  • दूसरों के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए

प्रशासन के सामने चुनौती

अब बीकानेर प्रशासन के सामने यह देखना है कि वे इस मामले में कैसे फैसला करते हैं। एक तरफ अस्पताल प्रबंधन है जो अपने अधिकारों की बात कर रहा है, तो दूसरी तरफ प्रदर्शनकारी जो मरीज की मौत पर न्याय की मांग कर रहे हैं।

अगले 15 दिनों में यह साफ हो जाएगा कि प्रशासन किसके पक्ष में खड़ा होता है और कानून के मुताबिक क्या कदम उठाए जाते हैं।


Thar Today की राय

यह मामला बीकानेर में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया है। कुछ लोग मानते हैं कि अस्पताल को नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए, वहीं कुछ का कहना है कि अगर सच में लापरवाही हुई है तो जवाबदेही तय होनी चाहिए।

हाईकोर्ट का यह फैसला दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण है और यह स्पष्ट करता है कि कानून की पालना सभी के लिए जरूरी है।