नई दिल्ली, : इस साल का अंतिम सूर्य ग्रहण रविवार, 21 सितंबर को लगेगा। यह एक आंशिक सूर्य ग्रहण होगा, जो भारतीय समयानुसार रात 10:59 बजे शुरू होगा, मध्यकाल रात 1:11 बजे होगा, और सुबह 3:23 बजे समाप्त होगा। हालांकि, यह खगोलीय घटना भारत में दिखाई नहीं देगी, क्योंकि उस समय देश में रात होगी। यह ग्रहण मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, अंटार्कटिका और कुछ प्रशांत द्वीपों में दृश्यमान होगा।
भारत में सूतक काल का प्रभाव नहीं
चूंकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए धार्मिक दृष्टिकोण से सूतक काल लागू नहीं होगा। सामान्यतः सूतक काल ग्रहण शुरू होने से 12 घंटे पहले लगता है, जिस दौरान धार्मिक और सामाजिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। इस दौरान अधिकांश मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं और ग्रहण समाप्ति के बाद गंगाजल से शुद्धिकरण के बाद ही पूजा-पाठ शुरू होता है। लेकिन भारत में इस बार सूतक न लगने के कारण सामान्य धार्मिक गतिविधियां प्रभावित नहीं होंगी।
ग्रहण काल में भी खुले रहने वाले मंदिर
हालांकि ग्रहण को धार्मिक रूप से अशुभ माना जाता है, लेकिन भारत के कुछ प्रसिद्ध मंदिर अपनी विशेष मान्यताओं के कारण ग्रहण काल में भी भक्तों के लिए खुले रहते हैं। इन मंदिरों में केवल दर्शन की अनुमति होती है, जबकि अन्य पूजा-विधियां स्थगित कर दी जाती हैं। ऐसे कुछ प्रमुख मंदिर निम्नलिखित हैं:
राजस्थान
- लक्ष्मीनाथ मंदिर, बीकानेर: इस मंदिर के कपाट ग्रहण काल में भी खुले रहते हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार, भगवान लक्ष्मीनाथ अपने भक्तों को ग्रहण के प्रभाव से बचाते हैं।
- श्रीनाथजी मंदिर, नाथद्वारा: इस मंदिर में भगवान श्रीनाथजी के दर्शन ग्रहण काल में भी जारी रहते हैं। मान्यता है कि जिस तरह श्रीनाथजी ने गिरिराज पर्वत उठाकर ब्रजवासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाया था, उसी तरह वे भक्तों को ग्रहण के दुष्प्रभावों से सुरक्षित रखते हैं।
मध्य प्रदेश
- महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन: ज्योतिर्लिंगों में से एक, महाकालेश्वर मंदिर ग्रहण काल में भी खुला रहता है। मान्यता है कि कालों के काल महाकाल पर ग्रहण का कोई प्रभाव नहीं पड़ता, क्योंकि वे स्वयं मृत्यु और समय के स्वामी हैं।
केरल
- थिरुवरप्पु श्रीकृष्ण मंदिर, कोट्टायम: इस मंदिर की विशेष धार्मिक मान्यता के कारण ग्रहण काल में भी भक्तों के लिए दर्शन उपलब्ध रहते हैं।
दिल्ली
- कालकाजी मंदिर: दिल्ली का यह प्रसिद्ध मंदिर भी ग्रहण के दौरान अपने कपाट बंद नहीं करता, जिससे भक्त बिना रुकावट माता के दर्शन कर सकते हैं।
उत्तराखंड
- कल्पेश्वर तीर्थ: देवभूमि उत्तराखंड का यह पवित्र तीर्थ स्थल भी ग्रहण काल में दर्शन के लिए खुला रहता है।
बिहार
- विष्णुपद मंदिर, गया: यह मंदिर अपनी प्राचीन मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है और ग्रहण के दौरान भी भक्तों के लिए खुला रहता है।
सूर्य ग्रहण का धार्मिक महत्व
धार्मिक दृष्टिकोण से सूर्य ग्रहण को अशुभ माना जाता है, क्योंकि यह सूर्य की शक्ति को क्षणिक रूप से कमजोर करता है। इस दौरान कई धार्मिक कार्य, जैसे हवन, यज्ञ और मांगलिक कार्य, वर्जित होते हैं। ग्रहण समाप्ति के बाद मंदिरों और घरों में शुद्धिकरण किया जाता है। लेकिन उपरोक्त मंदिरों की विशेष मान्यताएं इन्हें इस नियम से अलग करती हैं, जिसके कारण ये भक्तों के लिए खुले रहते हैं।
खगोलीय और सांस्कृतिक महत्व
यह आंशिक सूर्य ग्रहण खगोल विज्ञान के शौकीनों के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है। हालांकि भारत में यह दृश्यमान नहीं होगा, लेकिन यह घटना देश की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को एक बार फिर उजागर करती है। ग्रहण काल में खुले रहने वाले मंदिर न केवल श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक आश्रय प्रदान करते हैं, बल्कि भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत को भी दर्शाते हैं।
