राजस्थान

एक्सक्लूसिव: बीकानेर में ‘ग्रीन एनर्जी’ के नाम पर ‘हरियाली’ की हत्या? 193 खेजड़ी के पेड़ों पर चली आरी, रोकने गए पटवारी को घेरा

बीकानेर/पूगल | क्राइम डेस्क

राजस्थान के बीकानेर जिले में सौर ऊर्जा (Solar Energy) के विस्तार की चमक के पीछे एक स्याह सच छिपा है। पूगल तहसील के करणीसर भटियान गांव में नियमों को ताक पर रखकर राज्य वृक्ष ‘खेजड़ी’ की बलि दी जा रही है। ताजा मामला एक निजी सोलर प्लांट का है, जहां कथित तौर पर 193 हरी खेजड़ी के पेड़ों को अवैध रूप से काट दिया गया। हद तो तब हो गई जब राजस्व विभाग के कर्मचारी (पटवारी) मौका मुआयना करने पहुंचे, तो कंपनी के कारिंदों ने उन्हें ही रोक दिया और सरकारी काम में बाधा डाली।

इस घटना ने न केवल बिश्नोई समाज और पर्यावरण प्रेमियों को आक्रोशित कर दिया है, बल्कि प्रशासनिक गलियारों में भी हड़कंप मचा दिया है।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, करणीसर भटियान की रोही में एक बड़े सोलर प्रोजेक्ट का काम चल रहा है। आरोप है कि प्रोजेक्ट के लिए जमीन समतल करने की जल्दबाजी में कंपनी के ठेकेदारों ने पर्यावरण नियमों की धज्जियां उड़ा दीं। बिना सक्षम अनुमति के, मशीनों का उपयोग कर 193 खेजड़ी के पेड़ों को जड़ से उखाड़ दिया गया या काट दिया गया।

जब रक्षक ही बन गए बंधक?

मामले की गंभीरता तब बढ़ गई जब स्थानीय हल्का पटवारी को अवैध कटाई की सूचना मिली। जब पटवारी अपनी टीम के साथ मौका मुआयना (Site Inspection) करने और पंचनामा बनाने पहुंचे, तो वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों और कर्मचारियों ने कथित तौर पर उन्हें काम करने से रोक दिया।

  • राजकार्य में बाधा: प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कंपनी के कर्मचारियों ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बहस की और उन्हें साइट पर आगे बढ़ने से रोका।
  • केस दर्ज: इस दुस्साहस के बाद, प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। पटवारी की रिपोर्ट पर स्थानीय पुलिस थाने में सोलर कंपनी के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ पेड़ काटने (राजस्थान काश्तकारी अधिनियम) और राजकार्य में बाधा (IPC/BNS) की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

क्यों सुलग रहा है बीकानेर?

यह पहली घटना नहीं है। पिछले कुछ महीनों में बीकानेर, विशेषकर पूगल और छतरगढ़ इलाके में हजारों खेजड़ी के पेड़ काटे जाने के आरोप लगे हैं।

  • बिश्नोई समाज का अल्टीमेटम: अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा और स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों ने प्रशासन को चेतावनी दी है। उनका कहना है कि “विकास के नाम पर विनाश” बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
  • 193 का आंकड़ा: यह सिर्फ एक संख्या नहीं है। मरुस्थल में एक खेजड़ी को पनपने में दशकों लगते हैं। 193 पेड़ों का कटना उस क्षेत्र के इकोसिस्टम के लिए एक बड़ा झटका है।

पुलिस और प्रशासन का पक्ष

पुलिस अधिकारियों ने पुष्टि की है कि पटवारी की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि पेड़ काटने के आदेश किसने दिए थे और सरकारी कर्मचारी को रोकने वाले लोग कौन थे। मौके से सबूत जुटाने के लिए वन विभाग की टीम को भी शामिल किया जा सकता है।

अब आगे क्या?

इस घटना ने सोलर कंपनियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या ‘क्लीन एनर्जी’ के लिए स्थानीय पारिस्थितिकी को नष्ट करना जायज है? प्रशासन के लिए अब चुनौती यह है कि वे न केवल दोषियों को गिरफ्तार करें, बल्कि यह भी सुनिश्चित करें कि भविष्य में कोई भी कंपनी सरकारी अधिकारियों को डराने का प्रयास न कर सके।


महत्वपूर्ण बिंदु (Quick Facts)

घटना स्थलकरणीसर भटियान, तहसील पूगल, बीकानेर
नुकसान193 खेजड़ी के पेड़ (अवैध कटाई)
आरोपअवैध कटाई और पटवारी (लोक सेवक) को काम से रोकना
कार्रवाईपुलिस केस दर्ज, जांच शुरू

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